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राम मंदिर चढ़ावा मामला: CCTV, कैश और गबन की पूरी कहानी बयां कर रही SIT रिपोर्ट, इन लोगों पर उठे सवाल

Ram Mandir News: चढ़ावा चोरी मामले में SIT की शुरुआती रिपोर्ट में CCTV के आधार पर कई कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियां सामने आई हैं. रिपोर्ट में सुरक्षा और निगरानी में गंभीर लापरवाही का भी जिक्र है.

अयोध्या श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी और गबन के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 जून 2026 को यह प्रारंभिक रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजी है.

रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित अनियमितता किसी एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि लंबे समय तक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में कमियों का फायदा उठाकर चढ़ावे की चोरी की जाती रही. रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों के साथ-साथ निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे.

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CCTV फुटेज में कई संदिग्ध गतिविधियां दर्ज

SIT ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक उपलब्ध CCTV फुटेज की समीक्षा की. रिपोर्ट के अनुसार, फुटेज में करीब 70 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें कुछ कर्मचारी कथित तौर पर नोटों की गड्डियां और खुले रुपये अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और शरीर के अन्य हिस्सों में छिपाते हुए दिखाई दिए. जांच टीम का कहना है कि चोरी का तरीका लगभग हर घटना में एक जैसा था, जिससे यह संकेत मिलता है कि कथित गतिविधियां व्यवस्थित ढंग से लंबे समय से चल रही थीं. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 27 अप्रैल से पहले भी ऐसी घटनाओं की आशंका है, लेकिन उस अवधि के CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी पुष्टि नहीं हो सकी.

छह लोगों की भूमिका संदिग्ध, विस्तृत जांच की सिफारिश

SIT ने शुरुआती जांच में छह लोगों-अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रामशंकर मिश्र की भूमिका संदिग्ध बताई है. रिपोर्ट में इनके खिलाफ चोरी, गबन, आपराधिक दुर्विनियोग और आपराधिक न्यासभंग जैसी धाराओं में विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, जांच शुरू होने से पहले ही कुछ कर्मचारियों से लगभग 78.94 लाख रुपये बरामद किए गए थे. इसके अलावा 4 जून 2026 को गिनती कक्ष से करीब 2.25 लाख रुपये अतिरिक्त बरामद होने का भी उल्लेख किया गया है. कर्मचारियों के बैंक खातों की जांच में कई खातों में घोषित आय से अधिक नकद जमा और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन भी पाए गए हैं, जिनकी अलग से जांच की सिफारिश की गई है.

ट्रस्ट अधिकारियों और निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

SIT की रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित चोरी केवल कर्मचारियों की वजह से नहीं हुई, बल्कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में गंभीर लापरवाही ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई. रिपोर्ट के अनुसार, नकदी संग्रह और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी कर रहे डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका की भी समीक्षा की गई. जांच में पाया गया कि कर्मचारियों की तलाशी, बायोमेट्रिक उपस्थिति, निर्धारित ड्रेस कोड, निजी सामान पर रोक और अन्य सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू कराने संबंधी स्पष्ट लिखित निर्देश जारी नहीं किए गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा संबंधी कमियों की जानकारी होने के बावजूद समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए.

गिनती कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के बारे में भी रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें अनुशासनहीनता और सुरक्षा संबंधी कमियों की जानकारी थी, लेकिन नियमित तलाशी सहित आवश्यक निगरानी उपाय प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए गए. जांच समिति ने उनकी भूमिका की भी विस्तृत जांच की सिफारिश की है.

चाबियों के प्रबंधन और SOP पालन में मिली खामियां

रिपोर्ट में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है. जांच के अनुसार, उनके पास मंदिर परिसर की कई हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिए कोई स्पष्ट लिखित आदेश उपलब्ध नहीं मिला. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उन्होंने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव की गिनती ड्यूटी में सिफारिश की थी, जिससे कथित तौर पर उसे अनियमितता करने का अवसर मिला. इस पहलू की भी विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है.

SIT ने पाया कि ट्रस्ट और बैंक के बीच तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में कई सुरक्षा प्रावधान निर्धारित थे, लेकिन उनका पूरी तरह पालन नहीं किया गया. कई नियम केवल दस्तावेजों तक सीमित रहे.

नकदी प्रबंधन में कई कमियां, रिकॉर्ड प्रणाली मजबूत करने की सिफारिश

रिपोर्ट में नकदी और बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन में कई प्रशासनिक कमियों का उल्लेख किया गया है. कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं होती थी, निजी सामान पर प्रभावी नियंत्रण नहीं था और कई बार अलग-अलग हुंडियों से निकली नकदी को एक साथ मिलाकर गिना जाता था. इससे बाद में यह पता लगाना कठिन हो जाता था कि किस हुंडी से कितना चढ़ावा प्राप्त हुआ.

इसके अलावा बहुमूल्य वस्तुओं की फोटोग्राफी, वजन, सीलिंग और रिकॉर्डिंग हर बार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नहीं की गई. कई रजिस्टर अधूरे पाए गए और सामान के हस्तांतरण का पूरा रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं था.

CCTV फुटेज केवल 45 दिनों तक...

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि CCTV फुटेज केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखी जाती थी, जबकि पूर्व ऑडिट में इसे कम से कम 180 दिनों तक संरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी. पुराने फुटेज उपलब्ध न होने के कारण पहले की संभावित घटनाओं की पूरी जांच संभव नहीं हो सकी.

सोशल मीडिया पर चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के गायब होने के दावों की प्रथम दृष्टया पुष्टि SIT को नहीं मिली है. हालांकि, समिति ने बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड और उनके रखरखाव की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की सिफारिश की है.

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