'मंदिर के प्रबंधन में...', राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बोले शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती
Ram Mandir Donation Controversy: स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि "मंदिर के प्रबंधन में भी धार्मिकता होनी चाहिए. अगर दान आता है तो उसे उसी क्षेत्र में सामाजिक कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए."

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर चढ़ावा विवाद राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में चर्चाओं का विषय बना हुआ है, अब इस विवाद पर शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती की प्रतिक्रिया सामने आई है. शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज का कहना है कि, "मंदिर के प्रबंधन में भी धार्मिकता होनी चाहिए. अगर दान आता है तो उसे उसी क्षेत्र में सामाजिक कार्यों जैसे गौशाला, पाठशाला, गुरुकुल आदि पर खर्च किया जाना चाहिए."
दरअसल, राम मंदिर चढ़ावा विवाद की शुरुआत उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक्स पोस्ट से हुई थी. अखिलेश यादव ने अपनी एक्स पोस्ट पर दावा किया था कि 'समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पाई गई है.'
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अविमुक्तेश्वरानंद ने चंपत राय पर साधा निशाना
वहीं, इस विवाद पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि, "जब वहां चंपत राय बैठे हैं... चंपत का मतलब जानते हैं? चंप धातु से ही चंपत शब्द बना है. चंप का मतलब ही होता है लेकर भाग जाना. चंपत हो जाना. जब वहां पहले ही चंपत राय को बैठा दिए तो आपको समझ जाना चाहिए कि क्या होने वाला है." उधर, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है.
राम मंदिर चढ़ावा घोटाले की जांच के लिए SIT गठित
वहीं, राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच के लिए आज एसआईटी की टीम अयोध्या रवाना होगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय एसआईटी टीम को सात दिन के अंदर इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं. इस टीम का गठन शनिवार को किया गया था जिसके बाद आज अधिकारी कथित दान घोटाला मामले की जाँच के लिए अयोध्या जाएंगे.
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