अमेठी: खुदाई में मिले रहस्यमयी 29 धातु के गोले, सामने आई सच्चाई
Amethi News in Hindi: उत्तर प्रदेश के अमेठी में भवन निर्माण के लिए हो रही खुदाई के दौरान प्राचीन धातु के 29 गोले में मिले हैं. पुरातत्व विभाग ने इन्हें तोप में इस्तेमाल होने वाले गोले बताया है.

उत्तर प्रदेश के अमेठी खुदाई के दौरान भारी धातु के 29 गोले मिले हैं. जिसके बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई है. इन गोलाकार अवशेषों की जांच के लिए बुधवार को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम गांव पहुंची. टीम ने मौके का निरीक्षण करने के बाद इन धातु के गोलों को पुराने समय में तोपों में इस्तेमाल किए जाने वाला गोला बताया है. अधिकारियों के अनुसार सभी गोले तांबे से निर्मित हैं और करीब 80 से 90 वर्ष पुराने है.
ये मामला मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र के भनौली गांव का है, जहां रहने वाले मोहम्मद इकबाल अपने भूखंड पर शौचालय का निर्माण कराने के लिए सोमवार को गड्ढे की खुदाई करा रहे थे. इसी दौरान मजदूरों को जमीन के अंदर भारी और गोलाकार धातु की वस्तुएं दिखाई दीं. शुरुआत में मजदूर भी इन्हें देखकर हैरान रह गए. खुदाई आगे बढ़ने पर जब लगातार ऐसी वस्तुएं निकलने लगीं तो मजदूरों ने इसकी जानकारी भू-स्वामी को दिया.
शौचालय की खुदाई में मिले भारी धातु के गोले
खुदाई में इतनी बड़ी संख्या में भारी धातु के गोले मिलने की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया था. सूचना मिलने पर पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बरामद सभी वस्तुओं को अपनी निगरानी में ले लिया था. प्रभारी निरीक्षक विवेक कुमार सिंह ने कुल 29 गोलाकार धातु की वस्तुएं बरामद होने की पुष्टि की. जिसके बाद इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग को दी गई.
इस मामले पर उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग, लखनऊ के सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने बताया कि निरीक्षण के दौरान सामने आया कि बरामद गोले शस्त्र का हिस्सा हैं. इन्हें निष्क्रिय करने के उद्देश्य से जमीन में दबाया गया था. ये गोले तांबे से निर्मित हैं. इनका व्यास करीब 60 सेंटीमीटर और ऊंचाई लगभग 20 सेंटीमीटर है. प्रत्येक गोले का वजन करीब 9 से 10 किलोग्राम है.
प्राचीन तोप में इस्तेमाल किए जाने का दावा
मनोज यादव ने कहा कि इन गोलों की बनावट से पता चलता है कि पुराने समय में इन्हें तोप में डालकर फायर किया जाता था. कुछ गोलों में ऊपर की तरफ फ्यूज लगाने के लिए छेद भी बना हुआ है, जबकि कुछ की संरचना ऐसी है जिन्हें दूसरे तरीके से फेंके जाने की संभावना दिखाई देती है.
पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि इन गोलों की सबसे खास बात यह है कि इनका निर्माण तांबे से हुआ है. लंबे समय तक जमीन में दबे रहने के कारण इनके बाहरी हिस्से पर हरे रंग की परत यानी पेटिना जमा हो गई है. उन्होंने बताया कि कुल 29 गोले बरामद हुए हैं और सभी को प्रशासन की निगरानी में रखा गया है.
मौके पर निरीक्षण के दौरान जब पुरातत्व अधिकारी से पूछा गया कि क्या इस स्थान पर आगे भी खुदाई कराई जाएगी, तो उन्होंने इसे शोध का विषय बताया. डॉ. मनोज कुमार यादव ने कहा कि इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन और विभाग के अधिकारी आपस में विचार-विमर्श करेंगे. इसके बाद शासन और विभाग की ओर से जो आदेश या निर्देश प्राप्त होगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
अखिलेश को जयंत चौधरी का जवाब, RLD चीफ बोले- वो मजबूर कर रहे हैं...
मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने एहतियात के तौर पर घटनास्थल की सुरक्षा बढ़ा दी है. खुदाई वाले स्थान की बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस पिकेट तैनात है. ग्रामीणों और आसपास के लोगों को मौके से दूर रखा जा रहा है. सुरक्षा कारणों से भू-स्वामी के निर्माण कार्य को भी फिलहाल रोक दिया गया है.
मुसाफिरखाना के एसडीएम नितेश राज ने कहा कि फिलहाल भू-स्वामी को निर्माण कार्य करने की अनुमति नहीं दी गई है. उत्तर प्रदेश शासन और पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. अब इस मामले में शासन और पुरातत्व विभाग के अगले निर्देश का इंतजार किया जा रहा है.
अपने दांव में फंसे अखिलेश! AIMIM ने पूछा 20% मुस्लिमों की भागेदारी पर सवाल























