'एक-दो मामलों में किसी को गुंडा नहीं कहा जा सकता', इलाहाबाद हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी
Allahabad High Court ने प्रशासन की शक्तियों को सीमित करते हुए अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि केवल एक या दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी आदतन अपराधी घोषित नहीं किया जा सकता.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रशासनिक शक्तियों को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि केवल एक या दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी भी आरोपी को 'गुंडा' घोषित नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने से उस व्यक्ति और उसके पूरे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा और छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचती है.
हाईकोर्ट में जस्टिस संदीप जैन की एकल पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बात कही. ये याचिका बुलंदशहर के रहने वाले सतेंद्र ने दी थी, जिसमें छह महीने के लिए जिला बदर करने के आदेश को चुनौती दी गई थी. ये आदेश बुलंदशहर के एडिशनल जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) द्वारा पारित किया गया था, जिसे मेरठ आयुक्त ने भी बरकरार रखा था. प्रशासन ने दो आपराधिक मामलों के बाद उसे 'आदतन अपराधी' बताते हुए समाज के लिए खतरा करार दिया था.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने इसे मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि प्रशासन द्वारा जो दलीलें और तथ्य पेश किए गए वो कानूनी की कसौटियों पर खरे नहीं उतरते है. कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए ये साबित करना आवश्यक है कि उक्त शख्स नियमित रूप से आपराधिक गतिविधियों शामिल रहा है.
कोर्ट ने कहा कि केवल दो अलग-अलग मामले को आधार बनाकर किसी को आदतन अपराधी घोषित नहीं किया जा सकता है और अगर इन दोनों मामलों में समय का लंबा अंतराल हो तो उसे आदतन अपराधी कहने का आधार और कमजोर हो जाता है. ऐसे में निरंतर गतिविधियों के प्रमाण पेश करने जरूरी हैं.
कोर्ट ने कहा कि प्रशासन की ओर से जो तथ्य पेश किए गए हैं उन्हें आरोपी के आदतन अपराधी होने का सबूत नहीं है. कोर्ट ने माना कि केवल दो मामलों के आधार पर गुंडा घोषित करना उचित नहीं है. इसलिए कोर्ट ने उसके ख़िलाफ़ की गई पूरी कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया.
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