महाकुंभ भगदड़: इलाहाबाद हाईकोर्ट का ने यूपी सरकार से जवाब किया तलब, जांच आयोग पर पूछा सवाल
Mauni Amavasya Stampede: महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव सुरेश चंद्र पांडेय ने तमाम मांगों को लेकर जनहित याचिका दाखिल की थी.

Maha kumbh Stampede: प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ की घटना को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से न्यायिक आयोग द्वारा की जा रही जांच का दायरा बढ़ाए जाने को लेकर जवाब तलब किया है. कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या न्यायिक आयोग की जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है. इस मामले पर अगली सुनवाई 24 फरवरी को की जाएगी.
हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार दिनों का वक्त दिया है. महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव सुरेश चंद्र पांडेय ने तमाम मांगों को लेकर जनहित याचिका दाखिल की थी. चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की डिवीजन बेंच में इस मामले पर सुनवाई हुई.
कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
इस याचिका में मौतों की सही संख्या का पता लगाने, पीड़ितों के नाम सार्वजनिक किए जाने, कुछ शवों का पोस्टमार्टम नहीं कराए जाने की शिकायत की जांच कराए जाने, डेथ सर्टिफिकेट दिए जाने को लेकर लोगों को परेशान किए जाने समेत तमाम शिकायतों को उजागर करते हुए अलग से जांच कराए जाने का आदेश देने या फिर न्यायिक आयोग की जांच का दायरा बढ़ाए जाने की मांग की गई है.
बता दें कि मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से कुछ घंटों पहले ही संगम नोज पर अचानक भीड़ बढ़ने की वजह से भगदड़ मच गई थी. इस घटना के बाद कुछ घंटों के लिए साधु संतों ने अमृत स्नान को भी रोक दिया था. हालांकि बाद में प्रशासनिक पहल के बाद सभी अखाड़ों ने स्नान किया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भगदड़ में 30 लोगों की जान चली गई थी लेकिन, विपक्ष लगातार ज्यादा मौतें होने और सरकार पर सही आंकड़ा छुपाए जाने का आरोप लगा रहा है. मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को लोकसभा और यूपी विधानसभा दोनों जगहों पर ज़ोर शोर के साथ उठाया है. हालांकि सरकार अभी इस मामले में न्यायिक जांच की बात कहते हुए कुछ भी कहने से इनकार रही है.
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