राजस्थान में उर्दू-फारसी पर पाबंदी को लेकर कांग्रेस ने घेरा तो BJP बोली- 'हम अंग्रेजी को बर्दाश्त कर लेंगे, लेकिन...'
राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने उर्दू-फारसी पर बैन को लेकर डीजीपी रवि प्रकाश मेहरदा को प्रस्ताव तैयार करने के लिए पत्र लिखा है. इसको लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा है.

Urdu-Persian Controversy News: राजस्थान के पुलिस महकमे में उर्दू और फारसी पर पूरी तरह पाबंदी लगाए जाने के प्रस्ताव पर अब सियासत शुरू हो गई है. इसे लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने खड़े हो गए हैं. कांग्रेस पार्टी का कहना है कि उर्दू-फारसी को बदलने में जनता बीजेपी की सरकार को ही बदल देगी. वहीं बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि बदलाव की यह बयार भगवा पर जाकर रुकेगी. हम अंग्रेजी को बर्दाश्त कर लेंगे, लेकिन उर्दू-फारसी को नहीं.
गौरतलब है कि राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने 14 जून को एक पत्र जारी कर राज्य के पुलिस महकमे में उर्दू और फारसी भाषा के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगाए जाने और कामकाज सिर्फ हिंदी भाषा में किए जाने की बात कही थी.
डीजीपी को आदेश
उन्होंने इस बारे में औपचारिक तौर पर फैसला लेने के लिए राज्य के डीजीपी रवि प्रकाश मेहरदा को प्रस्ताव तैयार करने को कहा था. पत्र में कहा गया था कि उर्दू और फारसी भाषा का प्रयोग मुगलों के राज में किया जाता था.
उन्होंने कहा, ''मुगलों के वक्त में उर्दू और फारसी भाषा के इस्तेमाल को जरूरी किया गया था. उस वक्त ज्यादातर लोग उर्दू और फारसी भाषा का ज्ञान रखते थे, लेकिन मौजूदा वक्त में ज्यादातर पुलिसकर्मी उर्दू और फारसी भाषा की पढ़ाई नहीं करते हैं और ना ही उन्हें इसकी समझ होती है. ऐसे में कई बार अर्थ का अनर्थ हो जाता है. इसके चलते विभाग से लेकर आम नागरिकों तक को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ हर कोई हिंदी भाषा को समझता और पढ़ता है.''
जवाहर सिंह बेढम पर कांग्रेस का तंज
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम के इस पत्र पर राजस्थान में अब सियासी कोहराम मच गया है. कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि कानून की किताबों और नियमों से उर्दू और फारसी भाषा को हटाने में बीजेपी की सरकार बदल जाएगी.
उन्होंने गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम पर हमला करते हुए कहा है कि उनकी हैसियत एक सिपाही को हटा पाने की नहीं है और वह उर्दू व फारसी भाषा को हटाने की बात कर रहे हैं.
दूसरी तरफ़ बीजेपी ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के इस बयान पर पलटवार किया है. भीलवाड़ा सीट से बीजेपी के सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान सरकार की यह पहल स्वागत के लायक है. उनके मुताबिक अंग्रेजी भी विदेशी भाषा है, लेकिन सरकारी कामकाज में उसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
उन्होंने कहा है कि अगर लोग यह समझते हैं कि यह बदलाव भगवा को लाने की कोशिश है तो यह कतई गलत नहीं है. भगवा से किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए.
वैसे हकीकत यह है कि पुलिस महकमे से उर्दू और फारसी भाषा को हटाए जाने के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों ही सियासी रोटियां सेक रही है. दोनों को ना तो उर्दू और फारसी से हमदर्दी है और ना ही नफ़रत, लेकिन वोटो के नफे नुकसान के मद्देनजर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस मुद्दे को गरमाए रखना चाहती हैं.
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