'अगर पास होता तो...', महिला आरक्षण बिल पास न होने पर सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती की प्रतिक्रिया
Womens Reservation Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पास न होने पर सियासत तेज है. इस बीच ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल (एआईएससी) के अध्यक्ष सैयद नसुरुद्दीन चिश्ती ने प्रतिक्रिया दी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद देश को संबोधित किया. इस बीच उनके संबोधन को लेकर सियासत गरमा गई है. इस पर ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल (एआईएससी) के अध्यक्ष सैयद नसुरुद्दीन चिश्ती ने प्रतिक्रिया दी है.
सैयद नसुरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि मुझे पीएम के संबोधन की सबसे अच्छी बात यह लगी कि कुछ मसलें ऐसे होते हैं जिसमें राजनीतिक हित ऊपर उठकर देशहित के लिए सोचना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर नारी शक्ति अधिनियम संशोधन बिल पास होता तो किसी एक पार्टी की जीत नहीं होती, बल्कि यह पूरे लोकतंत्र की जीत होती.
महिला आरक्षण बिल गिरने पर क्या बोले सैयद नसुरुद्दीन चिश्ती?
सैयद नसुरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि अगर यह बिल पास होता तो महिलाओं को महिलाओं को सम्मान मिलता और उनको संवैधानिक अधिकार मिलता. उन्होंने कहा कि जब तक लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी नहीं बढ़ेगी तब तक महिला सशक्तिकरण की जो बात करते हैं वह बेईमानी मानी जाएगी.
सैयद नसुरुद्दीन चिश्ती ने आगे कहा कि दुनिया इस बात की गवाह है कि जहां महिलाएं, मां-बहनें मजबूत होती हैं वहां परिवार मजबूत होता है. वहां समाज मजबूत होता है और वहां लोकतंत्र मजबूत होता है. उन्होंने आगे कहा कि इसमें किसी एक पार्टी का मतलब नहीं था. मेरी खुद की सोच थी कि यह ऐतहासिक बिल था. महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता तो वह महिलाओं की बातों को और ज्यादा अच्छी तरह से संसद में रखतीं और महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ सकती थीं.
पीएम मोदी ने देश के नाम किया संबोधन
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संशोधन विधेयक गिरने के बाद शनिवार (18 अप्रैल) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने बिल का विरोध करने के लिए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और तृणमूल समेत विपक्षी पार्टियों पर हमला बोला.
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने अपनी संकीर्ण और स्वार्थ की राजनीति के चलते देश की आधी आबादी का हक छीन लिया. उन्होंने कहा कि ये परिवारवादी पार्टियां नहीं चाहतीं कि उनके परिवार से बाहर की कोई महिला राजनीति में आगे बढ़े.
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