'इस्तीफा समाधान नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच हो', NEET पेपर लीक पर राजकुमार रोत ने सरकार को घेरा
Rajasthan News: NEET पेपर लीक मामले पर BAP सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि सिर्फ केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा काफी नहीं है. पूरे पेपर लीक नेटवर्क और कोचिंग माफिया की उच्च स्तरीय जांच हो.

बांसवाड़ा-डूंगरपुर से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत ने डूंगरपुर जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र और राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक मामले में केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा काफी नहीं है. पूरे पेपर लीक नेटवर्क और कोचिंग माफिया की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. इसके अलावा उन्होंने जेनेवा दौरे, UCC, डी-लिस्टिंग, तबादलों और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अपनी बात रखी.
सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि NEET पेपर लीक ने देश के लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया है. उन्होंने कहा कि लाखों विद्यार्थियों ने वर्षों तक मेहनत की, लेकिन पेपर लीक माफिया ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
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रोत ने कहा कि सिर्फ मंत्री का इस्तीफा समाधान नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए. उन्होंने मांग की कि इस मामले में शामिल बड़े लोगों और कोचिंग माफिया को कानून के कठघरे में लाया जाए.
जेनेवा दौरे पर दी सफाई
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के जेनेवा अधिवेशन से लौटे सांसद रोत ने अपने दौरे को लेकर उठ रहे सवालों पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें किसी राजनीतिक दल या भारत सरकार ने नहीं भेजा था, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से व्यक्तिगत निमंत्रण मिला था.
उन्होंने दावा किया कि जेनेवा में उन्होंने भारत के आदिवासी समाज और वंचित वर्गों के अधिकारों तथा उनकी समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखा.
UCC और डी-लिस्टिंग पर सरकार को घेरा
प्रेस वार्ता में सांसद रोत ने समान नागरिक संहिता (UCC) और डी-लिस्टिंग के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं और जीवन शैली है.
उनका आरोप था कि सरकार मूलभूत मुद्दों से ध्यान भटकाकर समाज को बांटने का प्रयास कर रही है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे विषयों पर प्राथमिकता से काम किया जाना चाहिए.
राजस्थान सरकार द्वारा उदयपुर संभाग में किए जा रहे अधिकारियों के तबादलों पर भी सांसद ने नाराजगी जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि अनुभवी अधिकारियों को हटाकर कई महत्वपूर्ण पद खाली छोड़ दिए गए हैं. इससे आम लोगों को बिजली, पानी और दूसरी जरूरी सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
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बांसवाड़ा मेडिकल कॉलेज में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की मौतों पर दुख जताते हुए उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की.
प्रेस वार्ता में भारत आदिवासी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे. इस दौरान सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि उनकी पार्टी शिक्षा, आदिवासी अधिकार, स्वास्थ्य और जनहित से जुड़े मुद्दों पर संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष जारी रखेगी और जनता की आवाज को हर मंच पर मजबूती से उठाती रहेगी.
























