Rajasthan: चुनाव में लाखों खर्च करने वाले पंचायत समिति सदस्य आखिर क्यों हैं बेबस? CM गहलोत से की ये फरियाद
Rajasthan News: राजस्थान में लाखों खर्च कर चुनाव जीतने वाले पंचायत समिति सदस्यों का दर्द छलका है. उन्होंने चेतावनी दी है कि मांग नहीं पूरी होने पर आंदोलन किया जाएगा.

Rajasthan Panchayat Samiti Members Demand: राजस्थान में पंचायत समिति सदस्यों का दर्द छलका है. उनका कहना है कि चुनाव जीतने के बावजूद प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार नहीं हैं. आपको बता दें कि पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव 5 वर्ष के लिए होता है. पंचायत समिति के सदस्यों को क्षेत्र में विकास का काम कराना होता है. लेकिन मतदाताओं को किसी भी प्रकार की सुविधा उपलब्ध करने की शक्ति नहीं होती. चुनाव आयोग की गाइडलाइन्स की धज्जियां उड़ाने वाले पंचायत समिति सदस्यों का दावा है कि चुनाव लड़ने पर लाखों रुपए खर्च होते हैं. लूणी पंचायत समिति सदस्य सोहन राम विश्नोई कांग्रेस से जुड़े हुए हैं. उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं करवा सकता. पंचायत समिति सदस्यों की सुनवाई नहीं होती है.
पंचायत समिति सदस्यों का छलका दर्द
राजस्थान में 6000 से अधिक पंचायत समिति सदस्य ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ज्ञापन दिया है. जिला परिषद सीईओ अभिषेक सुराना ने एबीपी न्यूज़ को बताया कि चुनाव के दौरान कैटेगिरी वाइज खर्च कर सकते हैं. चुनाव आयोग की गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने चुनाव में खर्च का विवरण बताते कहा कि जिला परिषद सदस्य के लिए ₹1.50 लाख रुपए, पंचायत समिति सदस्य के लिए ₹75 हजार रुपए और सरपंच चुनाव के लिए ₹50 हजार रुपए अधिकतम खर्च का प्रावधान है. पंचायत समिति सदस्यों को किसी भी प्रकार के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार मिले हुए नहीं हैं. पंचायत समिति की साधारण सभा का कोरम पूरा करने के संसाधन मात्र रहते हैं. पंचायत समिति की बैठक भी 6 माह में एक बार होती है. पंचायत समिति सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र सरपंच से भी बड़ा होता है. सीएम गहलोत को दिए ज्ञापन में पंचायती राज संस्थाओं के महत्वपूर्ण अंग पंचायत समिति सदस्यों को मजबूत करने में मदद करने की मांग की गई है.
चुनाव में खर्च को लेकर नियमों को धत्ता बताने वाले नेताओ ने किये लाखो रुपए खर्च अब है बेबस पंचायत समिति सदस्य@ABPNews @SachinPilot @ashokgehlot51 @DrSatishPoonia @gssjodhpur @VasundharaBJP @pulkit @prempratap04 @PMOIndia @Inc @BJP4India pic.twitter.com/Zd749jr8qP
— करनपुरी (@abp_karan) January 9, 2023
सीएम गहलोत से की ये प्रमुख मांग
1- सरपंच प्रधान और जिला प्रमुख की तरह, पंचायत समिति सदस्यों को भी प्रशासनिक अधिकार (विभिन्न दस्तावेजो का सत्यापन / प्रमाणीकरण करने का अधिकार) देने के लिये विभाग स्तर से प्रपत्र जारी किया जाए.
2- अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिये केंद्र और राज्यों से प्राप्त अनुदान (SFC-TFC) और अन्य योजनाओं में से पंचायत समिति सदस्यों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर निर्धारित अनुपात में राशि उपलब्ध करवाई जाए.
3- अपने वार्ड में पंचायत समिति मद से विकास कार्य स्वीकृत करवाने के लिये, संबधित ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा प्रपत्र 5 दिये जाने की अनिवार्यता को हटाया जाए. इसकी जगह पंचायत समिति सदस्यों से प्रपत्र 5 लिये जाने की स्वीकृति जारी की जाए.
4- स्वायतशासी संस्थाओं (शहरी निकायों) के पार्षदों और पंचायती राज संस्थाओं के प्रधान जिला प्रमुख और सरपंच की तरह पंचायत समिति सदस्यों को भी मासिक मानदेय न्यूनतम 10000 रु स्वीकृत किये जाये.
5- सदस्य के वार्ड में होने वाले प्रत्येक विकास कार्यों की पूरी उपयोगिता प्रमाण पत्र, (UC, Cc) पर पंचायत समिति सदस्य के हस्ताक्षर अनिवार्य किए जाएं.
6- पंचायत समिति सदस्य के निर्वाचन क्षेत्र में आने वाली पंचायत की कोरम बैठकों में लिए जाने वाले निर्णयों (पट्टा, पत्रावलियों, अतिक्रमण) में कोरम के साथ विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किये जाने को लेकर विभाग से परिपत्र जारी करवाएं.
7- वार्ड क्षेत्र में होने वाले प्रत्येक विकास कार्य की शिलालेख पट्टिका पर पंचायत समिति सदस्य का नाम लिखे जाने को लेकर विभाग से परिपत्र जारी किया जाए.
8- पंचायत समिति सदस्य के वार्ड में पंचायत समिति से स्वीकृत विकास कार्यों में सदस्य की अनुसंशा अनिवार्य की जाए.
9- निर्वाचन क्षेत्र में आने वाली पंचायतों के विकास कार्यो की (प्रशासनिक स्वीकृति १) वितीय स्वीकृति) का प्रगति विवरण उपलब्ध करवाने के दिशा निर्देश जारी करें.
प्रदेश के पंचायत समिति सदस्यों ने मांग नहीं पूरी होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है. उन्होंने व्यवस्था में सुधार करने की मांग की है वरना अनुपयोगी पद को समाप्त कर 1995 से पहले की प्रकिर्या से प्रधान के चुनाव सम्पन्न करवाने की गुहार लगाई है.
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Source: IOCL






















