Rajasthan: 12 करोड़ के सोने की डकैती, नेपाल समेत पांच राज्यों की पुलिस के सहयोग से हुआ ये चौंकाने वाला खुलासा
इस केस में पुलिस के सामने बहुत बडा चेलेंज यह था कि हर कदम पर फर्जी आधार कार्ड, फर्जी सिम कार्ड और फर्जी पहचान पत्रों के चलते हर बार लीड मिस हो रही थी.

Udaipur News: उदयपुर के इतिहास में 12 करोड़ रुपये के 23 किलो सोने की डकैती के मामले में उदयपुर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. यह डकैती उदयपुर शहर के सुंदरवास क्षेत्र स्थित मणप्पुरण गोल्ड लॉन कार्यालय ने हुई थी. डकैती कोई सामान्य बदमाशों ने नहीं की थी, बल्कि शातिर और आदतन बदमाशों द्वारा की गई. इसी कारण दो बदमाशों तक पहुंचने में उदयपुर को नेपाल और देश के चार राज्यों की पुलिस का सहयोग लेना पड़ा. मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया लेकिन सोने का एक तोला तक बरामद नहीं हुआ.
नेपाल पुलिस की ली मदद
आईजी प्रफुल्ल कुमार ने बताया सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी अनुसंधान के बाद सामने आया कि आरोपी डबोक में किराए पर मकान लेकर रह रहे थे और खुद को स्टूडेंट बताया हुआ था. किराए के मकान पर पहुंचे तो वहां कोई नहीं मिला. आसपास के लोगों से बातचीत की और उनके हुलिए के बारे में पूछा. बताए हुलिए के आधार पर बिहार के होना लग रहे थे. इधर शहर से लेकर 16 किलोमीटर दूर डबोक तक के सभी सीसीटीवी फुटेज देखे. कुछ संदिग्ध सामने आए. इसके बाद बिहार गए जहां एक बार 7 और एक बार 17 दिन वहीं कैम्प किया. बदमाशों के ठिकानों पर दबिश दी गई. इसके बाद भी किसी का पता नहीं चल पाया. संभावना हुई कि कहीं आरोपी बॉर्डर क्रॉस करते हुए नेपाल तो नहीं पहुंच गए. नेपाल पुलिस से बात की और वहां पर भी तलाश करवाया लेकिन आरोपी नहीं मिले. फिर वहीं के एक व्यक्ति से सूचना मिली कि इस हुलिए के दोनों आरोपी राजस्थान की तरफ गए हैं. राजस्थान पुलिस को अलर्ट किया मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपी को निंबाहेड़ा में दबोचा.
डॉक्यूमेंट और नाम फर्जी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने डकैती से 15 दिन पहले बिहार से आकर डबोक में किराए पर कमरा लिया था वहां पर अपने फर्जी आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज मकान मालिक को बताकर कॉलेज छात्र होना कहा था. इसके बाद सुंदरवास स्थित मणप्पुरम गोल्ड लोन के ऑफिस के कई दिनों तक रेकी की लेकिन यह देखा कि किस रास्ते से आना है किस रास्ते से जाना है. पुलिस कहां-कहां तैनात होती है. मणप्पुरम कार्यालय में कौन-कौन कर्मचारी हैं. पुलिस थाना कितना दूर है. पुलिस की गश्त का टाइम क्या है. सीसीटीवी फुटेज कहां लगे हुए हैं. राजस्थान की बॉर्डर पार करने के लिए हाईवे को छोड़कर कच्चा रास्ता कौन सा है. सहित अन्य पहलुओं के 15 दिन तक स्टडी की इसके बाद आरोपियों ने डकैती की बड़ी बात तो यह है कि यह आरोपी वारदात के समय ही मिलते हैं और इसके बाद अपना हिस्सा लेकर अलग हो जाते हैं. इसी कारण इनको एक दूसरे का असली नाम और पता तक पता नहीं होता है.
दो आरोपी गिरफ्तार
आईजी प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि इस केस में पुलिस के सामने बहुत बडा चेलेंज यह था कि हर कदम पर फर्जी आधार कार्ड, फर्जी सिम कार्ड और फर्जी पहचान पत्रों के चलते जगह जगह डेड एन्ड मिल रहे थे. प्रत्येक लीड खत्म हो जा रही थी. लेकिन पुरी पुलिस टीम द्वारा इस चेलेंज को स्वीकार कर दिन रात एक कर वारदात का खुलासा किया है. इसके लिए पुरी टीम बधाई की पात्र है और इन्हें उचित पारितोषिक दिया जाएगा. मामले में बिहार के प्रिंस कुमार और फंटूश कुमार को गिरफ्तार किया है.
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