पन्ना धाय की जाति पर राजस्थान में कोहराम, केंद्र की किताब पर भड़का गुर्जर समाज
Panna Dhai caste Row: राजस्थान में वीरांगना पन्ना धाय की जाति को लेकर नया विवाद. केंद्र सरकार की एक किताब में पन्ना धाय को ‘क्षत्राणी’ बताए जाने के बाद गुर्जर समाज ने इसका विरोध शुरू कर दिया है.

राजस्थान में वीरांगना पन्ना धाय की जाति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. केंद्र सरकार की एक किताब में पन्ना धाय को ‘क्षत्राणी’ बताए जाने के बाद गुर्जर समाज ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. गुर्जर समाज का दावा है कि पन्ना धाय गुर्जर समाज से थीं.
गुर्जर समाज का कहना है कि इतिहास में उनकी पहचान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. ऐसा करके उनसे जुड़े इतिहास और पहचान को बदलने की कोशिश हो रही है. इसके साथ ही किताब में किए गए उल्लेख को तत्काल ठीक करने की मांग की गई है.
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केंद्र की किताब में क्या लिखा है ?
विवाद की शुरुआत केंद्र सरकार की ओर से प्रकाशित एक किताब 'भारत के नारी रत्न' में पन्ना धाय के बारे में दी गई जानकारी से हुई. इसमें पन्ना धाय को क्षत्राणी बताया गया है. यह बात सामने आने के बाद गुर्जर समाज में नाराजगी बढ़ गई. समाज के लोगों का कहना है कि पन्ना धाय सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए त्याग और बलिदान की मिसाल हैं. ऐसे में उनकी जातीय पहचान को लेकर किसी भी तरह की गलत जानकारी स्वीकार नहीं की जा सकती.
गुर्जर समाज का क्या दावा?
गुर्जर समाज के प्रमुख लोगों का दावा है कि पन्ना धाय गुर्जर समाज की वीरांगना थीं. उनका कहना है कि समाज लंबे समय से पन्ना धाय को अपनी बेटी और गौरव के रूप में मानता आया है. समाज के लोगों का आरोप है कि किताब में उन्हें क्षत्राणी बताना उनके इतिहास और पहचान को बदलने की कोशिश है.
गुर्जर समाज ने इस मामले में सरकार और संबंधित विभाग से किताब की जानकारी की दोबारा जांच कराने की मांग की है. समाज का कहना है कि इतिहास से जुड़े किसी भी व्यक्ति के बारे में जानकारी प्रकाशित करने से पहले प्रमाण और ऐतिहासिक स्रोतों की पूरी तरह जांच होनी चाहिए. अगर किताब में गलती हुई है तो उसे वापस लेकर सही जानकारी प्रकाशित की जाए.
इतिहास की किताब को लेकर बढ़ा विवाद
पन्ना धाय की जाति को लेकर उठा यह विवाद केवल एक किताब तक सीमित नहीं है. राजस्थान में पहले भी ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की जातीय पहचान को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं. अलग-अलग समाज अपने इतिहास और महापुरुषों को अपनी सामाजिक पहचान से जोड़ते रहे हैं. ऐसे में पन्ना धाय को लेकर शुरू हुई बहस ने भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को तेज कर दिया है.
गुर्जर समाज का कहना है कि पन्ना धाय ने मेवाड़ के राजकुमार उदयसिंह की जान बचाने के लिए अपने बेटे चंदन का बलिदान दिया था. उनका त्याग राजस्थान के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. समाज चाहता है कि उनके बलिदान और पहचान से जुड़े तथ्यों को किसी विवाद के बजाय प्रमाणित इतिहास के आधार पर सामने रखा जाए.
आंदोलन की चेतावनी
किताब में पन्ना धाय को क्षत्राणी बताए जाने के विरोध में गुर्जर समाज के लोग अब सरकार से जवाब मांग रहे हैं और आंदोलन की चेतावनी भी दी है. समाज की मांग है कि संबंधित किताब में दर्ज जानकारी की समीक्षा हो और सही तथ्य सामने लाए जाएं. साथ ही, गलत जानकारी होने पर उसे संशोधित किया जाए.
फिलहाल पन्ना धाय की जाति को लेकर छिड़े इस विवाद ने राजस्थान में नई बहस छेड़ दी है. अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाएं गुर्जर समाज की आपत्ति पर क्या कदम उठाती हैं.
कौन थीं पन्ना धाय?
पन्ना धाय मेवाड़ के इतिहास की महान वीरांगना और त्याग की मिसाल मानी जाती हैं. वो मेवाड़ के राजघराने में राजकुमार उदयसिंह की धाय मां थीं. महाराणा सांगा के निधन के बाद मेवाड़ में सत्ता को लेकर संघर्ष शुरू हुआ. इसी दौरान बनवीर ने राजकुमार उदयसिंह की हत्या की साजिश रची. पन्ना धाय को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने उदयसिंह की जान बचाने का फैसला किया.
उन्होंने राजकुमार को सुरक्षित जगह पहुंचा दिया और उसकी जगह अपने बेटे चंदन को राजकुमार की शय्या पर सुला दिया. बनवीर ने धोखे में चंदन की हत्या कर दी. अपने बेटे की आंखों के सामने हुई हत्या का दर्द सहने के बावजूद पन्ना धाय ने उदयसिंह की सुरक्षा को प्राथमिकता दी. बाद में उदयसिंह मेवाड़ के शासक बने और महाराणा प्रताप के पिता हुए. पन्ना धाय का यह त्याग राजस्थान ही नहीं, भारतीय इतिहास में भी मातृत्व, कर्तव्य और बलिदान की अद्भुत मिसाल माना जाता है.
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