IIT बॉम्बे का खुलासा, राजस्थान हाई कार्ट का डोम कमजोर, कोर्ट का स्वत: संज्ञान
Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित इमारत की स्थिति को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि भवन के मध्य स्थित करीब 21 मीटर ऊंचा सेंट्रल डोम कभी भी गिर सकता है

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्य भवन की संरचनात्मक स्थिति को लेकर हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि भवन के मध्य स्थित करीब 21 मीटर ऊंचा सेंट्रल डोम कभी भी गिर सकता है. IIT बॉम्बे के विशेषज्ञों ने जांच में डोम की स्थिति को गंभीर और तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत वाली बताया गया है.
हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने भवन की सुरक्षा को लेकर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब भी मांगा है.
राजस्थान में इस तारीख से लग जाएगी आचार संहिता, पंचायत-निकाय चुनाव से पहले करना होगा यह काम
कुछ ही वर्षों में सामने आए कई संरचनात्मक दोष
कोर्ट के आदेश में बताया गया कि हाईकोर्ट के नए भवन का निर्माण कार्य 2011 में शुरू हुआ और 2013 के अंत तक इसका स्ट्रक्चरल कार्य पूरा हो गया था. दिसंबर 2019 में भवन को सौंपा गया था. इसके बाद कुछ ही वर्षों में भवन के विभिन्न हिस्सों में छत गिरने, प्लास्टर उखड़ने, सीलन और अन्य संरचनात्मक समस्याओं की कई घटनाएं सामने आईं.
कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, कोर्ट रूम, जजों के चैंबर, बिल सेक्शन, लिफ्ट के पास और कॉरिडोर सहित कई स्थानों पर छत या फॉल्स सीलिंग गिर चुकी है. डोम क्षेत्र में भी प्लास्टर गिरने की घटना सामने आई थी.
IIT की जांच में सरियों में जंग और कंक्रीट की कमजोरी
IIT जोधपुर की रिपोर्ट में भवन के कई हिस्सों में स्टील रीइन्फोर्समेंट में जंग, कंक्रीट में क्रैकिंग और वॉटरप्रूफिंग से जुड़ी खामियां सामने आने का उल्लेख है. जांच में कुछ स्थानों पर कंक्रीट की गुणवत्ता संदिग्ध से खराब पाई गई तथा पानी के नमूनों में क्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक बताई गई. बाद में कराए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में भी भवन की मरम्मत और पुनर्वास की जरूरत सामने आई. मरम्मत कार्यों को हाई, मीडियम और लो क्रिटिकलिटी के स्तरों में बांटा गया है.
IIT बॉम्बे की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
हाल में IIT बॉम्बे द्वारा किए जा रहे स्ट्रक्चरल ऑडिट में पाया गया कि भवन में रीइन्फोर्समेंट करप्शन, कार्बोनेशन और कुछ हिस्सों में क्लोराइड कंटेमिनेशन के कारण संरचनात्मक क्षरण हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक निरीक्षण किए गए क्षेत्रों में करीब 40 प्रतिशत हिस्से कंक्रीट के अचानक उखड़ने यानी स्पॉलिंग के खतरे की श्रेणी में पाए गए. IIT बॉम्बे ने चेतावनी दी कि नमी बढ़ने पर जंग की प्रक्रिया तेज हो सकती है और कंक्रीट का बाहरी हिस्सा बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के अचानक गिर सकता है.
डोम क्षेत्र को किया गया कॉर्डन ऑफ
हाईकोर्ट ने IIT बॉम्बे की अंतरिम सिफारिशों के आधार पर सेंट्रल डोम के खुले गोलाकार हिस्से को कॉर्डन ऑफ करने और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं. भवन में पानी की सीलन और प्लंबिंग से जुड़ी लीकेज को तत्काल दूर करने को भी कहा गया है.
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सेंट्रल डोम और अन्य महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सों की 24 घंटे लगातार निगरानी की जाए तथा योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियरों की टीम द्वारा इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए.
24 अगस्त को बड़े अधिकारियों की व्यक्तिगत मौजूदगी
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को तय की है. उस दिन राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव, सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव, RSRDC के प्रबंध निदेशक, राजस्थान के पुलिस महानिदेशक सहित IIT जोधपुर और IIT बॉम्बे के नामित प्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं.
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि संवैधानिक संस्था के परिसर में मौजूद लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी तरह की देरी या जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की प्रवृत्ति को गंभीरता से लिया जाएगा.
'लड़की क्या पहने, यह उसकी मर्जी, लड़कों की सोच...', दिल्ली HC की सख्त टिप्पणी
























