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Kota News: नहरों के लिए मिले 1274 करोड़, 10 साल में भी पूरे नहीं हुआ काम,CADA की बैठक में उठा मुद्दा

Rajasthan News: बैठक में शोभागपुरा समिति के अध्यक्ष अर्जुनराम ने कहा कि नहरों के रेगुलेशन के लिए ठेका हो जाता है,लेकिन ठेकेदार काम ही नहीं करता है.यह काम मनरेगा से कराया जाता है.

कोटा: राज्य सरकार ने 2012 में चंबल की नहरों के सुदृढ़ीकरण के लिए 1274 करोड़ रुपए दिए थे.अब 10 साल बाद भी इस पैसों से काम पूरे नहीं हो पाए हैं.यह विषय चंबल सिंचित क्षेत्र विकास प्राधिकरण (CADA) की बैठक में भी उठाया गया था.जहां कहा कि इनके छोटे छोटे टेंडर करके टुकड़ों में काम कराया जाता तो कार्य जल्दी संपन्न हो सकता था.नहरों पर हो रहे पक्के निर्माण की क्वालिटी,सीएडी की जमीन पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर अधिकारियों पर चंबल परियोजना समिति के सदस्य खूब बिफरे.चंबल परियोजना समिति की बैठक में सभापति सुनील गालव ने अधिकारियों पर जमकर हमला बोला.उन्होंने जुलाई से सितंबर तक भी नहरों में पानी देने, सदस्यों के प्रशिक्षण,निर्माण की उच्च स्तरीय जांच और बिना समिति अध्यक्ष की एनओसी के ठेकेदार को भुगतान नहीं करने संबंधी प्रस्ताव पारित किए गए.

लुटाया जा रहा है किसानों का पैसा

सभापति ने कहा कि 1274 करोड़ के विभिन्न कार्यों की विस्तृत जांच होनी चाहिए.इसके तहत होने वाले कार्यों की क्वालिटी बहुत घटिया है.एक कमेटी बनाकर विशेषज्ञों के साथ इसकी जांच करानी होगी.सीएडी की मिलीभगत से किसानों के पैसे को लुटाया जा रहा है.समिति में बिना अध्यक्ष की एनओसी ठेकेदार को भुगतान नहीं करने का प्रस्ताव लिया गया.अतिरिक्त आयुक्त नरेश मालव ने सभी एक्सईएन को समिति सदस्यों को भी वर्क ऑर्डर की कॉपी देने के निर्देश दिए.

सदस्यों ने कहा कि पहले 12 महीने नहरों का संचालन होता था.उत्तर प्रदेश में भी 12 महीने नहरें चलती हैं,लेकिन कोई खतरा नहीं होता है.अब धोरे भी पक्के हो गए और बरसात के दिनों में अतिरिक्त पानी भी होता है.सभापति ने कहा कि क्षेत्र में पानी भरने से सोयाबीन की पैदावार घट गई है. यदि सीएडी जुलाई से सितंबर के बीच भी नहरों में पानी देने की गारंटी दे तो क्षेत्र में धान की खेती हो सकती है.

राजस्थान और मध्य प्रदेश में है समझौता
अतिरिक्त आयुक्त नरेश मालव ने कहा कि मार्च से जून तक ठेकेदार को पूरी नहर खाली करके दे दें, ताकि वह काम कर सके.सीएडी प्रशासन को जुलाई से सितंबर के बीच भी नहर संचालन पर विचार करना चाहिए.इस पर निर्णय पर मध्य प्रदेश के साथ बात करके ही लिया जा सकता है.क्योकि पानी का मसला राजस्थान और मध्य प्रदेश के समझोते के आधार पर ही होता है.इस अवसर पर शोभागपुरा,कासिमपुरा,सुवांसा माइनर को मॉडल के रुप में विकसित करने की बात कही गई.
 
काम मनरेगा से और भुगतान ठेकेदार को
बैठक में नहरों के रेगुलेशन में लगे कर्मचारियों के भुगतान का मुद्दा भी उठाया गया.शोभागपुरा समिति के अध्यक्ष अर्जुनराम ने कहा कि नहरों के रेगुलेशन के लिए ठेका हो जाता है,लेकिन ठेकेदार काम ही नहीं करता है.यह काम मनरेगा से कराया जाता है.कुलदीप सिंह ने कहा कि ऐसे ठेकेदारों को ब्लेक लिस्टेड किया जाए.उन्होंने कहा कि खातोली वितरिका में 20 आदमियों को 1.90 लाख का भुगतान कर दिया गया.

तीरथ गांव में सीएडी की तीन बीघा जमीन पर अतिक्रमण कर मकान बनाने का मुद्दा उठा.सदस्यों ने कहा कि कोलोनाइजर कृषि भूमि पर कॉलोनी काट देते हैं और नहरों पर भी निर्माण करा देते हैं.इनकी भू रूपांतरण से पूर्व सीएडी से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य करना चाहिए.अतिरिक्त आयुक्त नरेश मालव ने कहा कि नहर पर कहीं पर भी पुलिया सड़क के निर्माण की स्वीकृति उच्च स्तर से लेना जरूरी है.कोई भी अधिकारी अपने स्तर पर ऐसी स्वीकृति न दे.  

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