Rajasthan: अब खेत में घुसे जानवरों को लगेगा 'झटका', कोटा के किसान ने जुगाड़ से बनाई ये खास मशीन
Kota News: एक ऐसी मशीन किसान द्वारा बनाई गई है, जो एक ही झटके में जानवरों को हमेशा के लिए भगा देती है. इससे जानवर भी सुरक्षित रहता है और खेत भी. किसान के खेत की रखवाली को इस जुगाड़ ने आसान बना दिया है.

Rajasthan Farmer News: देश में जुगाड बडे-बडे कामों को भी मिनटों में कर देते हैं और खर्चा भी बेहद कम आता है. ऐसा ही जुगाड़ कोटा संभाग में देखने को मिल रहा है. एक ऐसी मशीन किसान द्वारा बनाई गई है, जो एक ही झटके में जानवरों को हमेशा के लिए भगा देती है. इससे जानवर भी सुरक्षित रहता है और खेत भी. किसान के खेत की रखवाली को इस जुगाड़ ने आसान बना दिया है. अंता क्षेत्र के किसानों के लिए खेतों की रखवाली को आसान बना दिया है. इस प्रयोग का अभी कोई टेक्निकल नाम भले ही नहीं दिया गया हो, लेकिन यह मशीन जमकर प्रचलित हो रहा है.
हिरण से परेशान होकर निकाला जुगाड़
किसानों का कहना है कि फसल नष्ट करने आए जंगली जानवरों एवं आवारा पशु इस मशीन से जुड़े तारों से एक बार झटका खाने के बाद दोबारा खेत की ओर पलट कर भी नहीं देखते, जिससे कृषक वर्ग को फसल के दिनों में खेत की रात दिन रखवाली से छुटकारा मिला है. अन्ता के निकट सोरसन अभ्यारण्य होने से हिरण की संख्या हजारों में हैं, जो दूर दराज तक के खेतों में जाकर फसलों को चट कर जाते हैं. इसके अलावा गाय, भैंस सहित जंगली सुअर, रोझड़े, नीलगाय आदि भी विशेषकर रात को खेत में प्रवेश कर नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन अब सैंकड़ों खेतों पर झटका मशीन लग जाने से पशु एवं जानवर तारबंदी से टच होते ही करंट का झटका लगने से वहां फटकना बंद हो गए.
टाइमर सेट हो जाता है और सायरन भी बजता है
इस मामूली झटके से जानवर को शारीरिक नुकसान नहीं होता, लेकिन भय बैठ जाता है, बहुत ही कम केसों में यदि जानवर तारबंदी में उलझा रह जाए तो बार-बार के झटके से उसकी मृत्यु भी सम्भव है. दूसरी ओर झटका मशीन की खासियत यह भी है कि तार से जानवर के टच होने, तार टूटने या अन्य अवरोध की स्थिति में जोर से साइरन बोलने लगता है जो अवरोध दूर करने पर ही बंद होगा. ऐसे में यदि किसान खेत में नहीं है तो लगातार बजते सायरन से बैटरी डिस्चार्ज होने का खतरा बना रहता है.
ऐसे काम करती है मशीन
10 से 12 हजार की लागत वाली झटका मशीन में टाइमर लगा होता है, जिसे किसान सुविधानुसार 12 या 24 घंटे पर सेट कर सकते हैं. टाइमर के हिसाब से खेत के चारों ओर मशीन से जुड़े तारों में बेटरी द्वारा करंट प्रवाहित होता रहता है. मशीन के साथ एक सौर उर्जा प्लेट आती है, जिससे बैटरी सूर्य की किरणों से चार्ज हो जाती है. वहीं बाइक के क्लच वायर जैसा एक तार खेत के चारों ओर पत्थर या लकड़ी के 4-5 फिट लम्बे पिल्लर गाड़ कर थोड़ी-थोड़ी ऊंचाई पर तीन या चार बार लपेटते हैं.
यह तार पत्थर एवं लकड़ी को छू जाने पर करंट खर्च करता है, ऐसे में चारदीवारी पर लगे पिल्लरों में प्लास्टिक के क्लिप लगा वायर को इनसे दूर रखा जाता है. तार का खर्च 500 से 600 रुपए प्रति बीघा एवं प्लास्टिक क्लिप की दर पांच रुपए प्रति नग के आसपास है. खास बात यह है कि एक झटका मशीन से लगभग 100 बीघा खेत की रखवाली की जा सकती है. बैटरी से कई किसान एक विशेष तरह का पंखा भी संचालित कर लेते हैं.
बंदरों ने बचाओं का निकाल लिया तोड़
झटका मशीन पशुओं एवं जंगली जानवरों पर तो कारगर साबित हो रही है, लेकिन बंदरों ने इसका तोड़ निकाल लिया है. बंदर अब इसके काबू में नहीं आ रहे, किसानों के अनुसार बंदर छलांग लगा बाड़ाबंदी के लिए लगाए करंट से प्रवाहित तार को कूद जाते हैं. हालांकि बंदर केवल दिन में आकर ही सोयाबीन, धनिया, सरसों, चना आदि फसल चट करते हैं. इस समय लगभग सभी किसान खेत पर मौजूद रहने नुकसान की सम्भावना कम हो जाती है.
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