Rajasthan: राजस्थान को मिला ‘मिनी एम्स’! विधानसभा में पास हुआ बिल, जानें- RIMS में क्या होगा खास?
Rajasthan Health Science Bill: राजस्थान विधानसभा ने RIMS स्थापना के लिए संशोधन विधेयक पारित किया. यह संस्थान एम्स दिल्ली की तर्ज पर विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं व सुपर स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध कराएगा.

राजस्थान विधानसभा में मानसूत्र जारी है. इस बीच बुधवार (3 सितंबर) को सभा ने ध्वनिमत से राजस्थान हेल्थ साइंसेज यूनिवर्सिटी (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित कर दिया. स्वास्थ्य मंत्री ने इस बिल को लेकर बड़े दावे किए हैं.
इस बिल के तहत 40 एकड़ क्षेत्र में राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) को अपग्रेड करके राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) स्थापित किया जाएगा. इसका महत्व इसलिए है क्योंकि यह संस्थान एम्स दिल्ली की तर्ज पर विश्वस्तरीय और सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा.
स्वास्थ्य मंत्री ने दिए आश्वासन
मेडिकल व हेल्थ मंत्री गजेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब देते हुए बताया कि सरकार ने RIMS के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान किया है. पीटीआई के अनुसार, उन्होंने कहा कि संस्थान तैयार होने पर राजस्थान उन्नत चिकित्सा सेवाओं का अग्रणी केंद्र बनेगा और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. अगले दो सालों में इसका निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है.
यहां सरकारी योजनाओं के पात्र मरीजों को निःशुल्क उपचार मिलेगा जिससे अन्य सरकारी अस्पतालों पर भार भी घटेगा. मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह संस्थान एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करेगा.
क्या है विधेयक के प्रावधान?
बिल के अनुसार राज्य सरकार किसी भी संबद्ध कॉलेज को सरकारी कॉलेज घोषित कर सकेगी. कॉलेज से जुड़ी भूमि, भवन और लैब जैसी सभी परिसंपत्तियां सरकार के नियंत्रण में होंगी. RIMS एक स्वायत्त विश्वविद्यालय के रूप में डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक मान्यता प्रदान करेगा. गवर्निंग बॉडी में एम्स दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़ और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे.
सुपर स्पेशलिटी और नई सुविधाएं
RIMS में हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, एंडोक्राइनोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, सीटीवीएस और अंग प्रत्यारोपण जैसी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध होंगी. साथ ही, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, जेरियाट्रिक मेडिसिन, रूमेटोलॉजी, प्रजनन जीवविज्ञान, जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, स्लीप मेडिसिन और क्रिटिकल केयर जैसे नए उपविभाग भी शुरू किए जाएंगे. इन अत्याधुनिक विभागों से राजस्थान न सिर्फ देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करेगा.
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