राजस्थान में AI रोकेगा पानी की चोरी, जयपुर में सफल रहा पायलट प्रोजेक्ट
राजस्थान में पानी की चोरी रोकने के लिए अब सरकार AI की मदद लेने जा रही है. जिससे न सिर्फ चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि सरकार को राजस्व हानि भी कम होगी.

रेगिस्तान कहा जाने वाला राजस्थान प्रदेश हमेशा पानी की किल्लत से जूझता रहता है. यहां बड़े पैमाने पर पीने के पानी की चोरी भी होती है. राजस्थान सरकार ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से हाईटेक तरीके का इस्तेमाल कर पानी की चोरी रोकने की योजना तैयार की है.
इसके तहत एआई की मदद से टैंकर के जरिए पानी की चोरी पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाना है. राजधानी जयपुर में इसका पायलट प्रोजेक्ट सफल हो चुका है. नतीजे से उत्साहित सरकार इसे जल्द ही पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी में है. दावा किया जा रहा है कि एआई बेस्ड यह सिस्टम इतना फुल प्रूफ है कि इसमें एक बूंद पानी की भी चोरी नहीं हो सकती है.
2024 में शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट
पानी की चोरी रोकने के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत दिसंबर 2024 में राजधानी जयपुर के मालवीय नगर हाइड्रेंट से प्रयोग के तौर पर की गई थी. शुरुआती 18 दिनों में ही स्काडा सिस्टम ने टैंकरों से चार गुना से ज्यादा पानी भरने की चोरी पकड़ी. इसके बाद दिसंबर 2025 में इसे एआई तकनीक से जोड़ा गया और पूरे सिस्टम को और फुल प्रूफ कर फिर से टेस्टिंग शुरू की गई.
यहां इस सिस्टम ने दिसंबर 2025 में 301 और इस साल के मई और जून महीने के 22 दिनों में 319 टैंकर की चोरी पकड़ी. जयपुर के ही खो नागोरियन इलाके में प्रयोग के तौर पर लगाए गए एआई बेस्ड स्काडा सिस्टम ने 846 और जून महीने में 803 टैंकरों की पानी चोरी पकड़ी.
इस सिस्टम से स्पष्ट हुआ कि पानी की चोरी की जा रही है
इस सिस्टम के एक्टिव होने से यह साफ हुआ कि राजधानी जयपुर में बीसलपुर बांध से महंगे खर्च पर जो पानी यहां लोगों को सप्लाई करने के लिए इकट्ठा किया जाता है, उसकी बड़े पैमाने पर चोरी की जाती है. सरकार इस पानी को जरूरतमंद प्यासे लोगों तक टैंकरों के जरिए पहुंचाती है. हाइड्रेंट से जितने टैंकर पानी जरूरतमंदो की प्यास बुझाने के लिए भेजे जाते हैं, उससे करीब आठ से दस गुना तक टैंकर बिल्डर्स और दूसरे लोगों को पानी के दूसरे उपयोग के लिए चोरी से दे दिए जाते हैं.
कामर्शियल उपयोग के लिए सरकार ने अलग फीस निर्धारित कर रखी है, जबकि लोगों को पेयजल मुहैया कराने का खर्च सरकार खुद उठाती है. ऐसे में इस सिस्टम के पूरे राजस्थान में लगने से करोड़ों रुपए की राजस्व चोरी और पानी की चोरी दोनों पर शिकंजा कसा जा सकता है.
ऐसे काम करता है यह सिस्टम
एआई की मदद से स्काडा बेस्ड यह सिस्टम पूरी तरह ऑटोमेटिक है. इसमें कई स्तर पर न सिर्फ एक-एक बूंद पानी का डेटा संबंधित लोगों तक अपडेट होता रहता है, बल्कि इसकी लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग भी की जा सकती है. टैंक का वाल्व बिना कमांड के नहीं खुलेगा और सॉफ्टवेयर के जरिए जितना पानी फीड किया जाएगा, टैंकर में सिर्फ उतना ही भरेगा और उसके बाद टैंक का वाल्व ऑटोमेटिक बंद हो जाएगा.
इसमें सबसे पहले पानी का टैंकर हाइड्रेंट पर पहुंचता है और उसके बाद टैंकर भरने की अनुमति एप के जरिए संबंधित अधिकारी से मांगी जाती है. उसके बाद अधिकारी की ओर से ट्रिप डिटेल एप पर भरकर ड्राइवर को भेजी जाती है. ड्राइवर जब रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करता है तो उसके बाद टैंकर वहां लगे कैमरे के सामने पहुंचता और कैमरा उस टैंकर के नंबर की एआई के माध्यम से जांच करता है.
नंबर सही पाने और टैंकर चालक के एप पर बुकिंग होने के बाद 'रिक्वेस्ट फॉर ओपन वॉल' पॉपअप जनरेट होता है. इस पर ड्राइवर की ओर से क्लिक करने पर इंजीनियर एप पर ओपन वॉल का पॉपअप दिखता है, उसमें टैंकर की फोटो भी दिखाई देती है. इंजीनियर की ओर से उसे वेरिफाई करने के बाद हाइड्रेंट का वॉल खुल जाता और टैंकर में चार हजार लीटर पानी स्वत: ही भर जाता है.चार हजार लीटर या फिर इससे कम मात्रा में फीड किया गया पानी टैंकर में भरते ही हाइड्रेंट का वाल्व खुद ही बंद हो जाता है.
इसके बाद टैंकर ड्राइवर उपभोक्ता के घर या कालोनी में पहुंचता है और ओटीपी व वीडियो के माध्यम से ट्रिप को पूरी करता है. टैंकर खाली होने के बाद वीडियो संबंधित अधिकारियों के पास पहुंचता है, जिसे वह वेरिफाई कर ट्रिप को कंपलीट कर देते हैं.यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनवॉइस भी खुद ही जनरेट हो जाता है.
सिर्फ जयपुर में हो सकती है हर माह करोड़ों के राजस्व की बचत
जयपुर शहर में जीपीएस से चलने वाले टैंकर में पानी जलदाय विभाग की ओर से नि:शुल्क भरा जाता है. टैंकर चालक को दूरी के हिसाब से न्यूनतम 180 रूपए प्रति ट्रिप का भुगतान किया जाता है, जो दूरी के अनुसार 386 रूपए तक बढ़ता जाता है. यदि टैंकर चालक अपने हिसाब से बुकिंग का पानी बेचता है तो उसे ज्यादा मुनाफा होता है, क्योंकि वह उपभोक्ता से राशि वसूलता है और विभाग की ओर से भी तय राशि उसे मिल जाती है. जबकि यदि वह बिना ट्रिप के जलदाय विभाग का पानी भरकर बेचता है तो उसे उपभोक्ता से 400 से 500 रूपए मिल जाते हैं.
पूरे जयपुर शहर में करीब 300 टैंकर संचालित है. मालवीय नगर के हाईड्रेंट से केवल तीन टैंकर ने लाखों के राजस्व को चपत लगा दी. ऐसे में अनुमान है कि शहर के 300 टैंकर पर यह सिस्टम लागू हो तो प्रतिमाह करोड़ों का राजस्व सरकार का बच सकेगा. ऐसे में अगर इस सिस्टम को पूरे राजस्थान में लागू कर दिया जाए तो न सिर्फ पीक सीजन में राजस्थान में होने वाली पेयजल की किल्लत काफी कम हो जाएगी बल्कि साथ ही सरकार को करोड़ों का राजस्व भी मिलने लगेगा.
चोरी रोकने का सिस्टम पास, लेकिन लागू कराने का सिस्टम फेल
इस साल मई और जून महीने में राजधानी जयपुर में दो हाइड्रेंट पॉइंट पर प्रयोग के तौर पर लगाए गए एआई बेस्ड स्कोडा सिस्टम के पूरी तरह सफल होने के बाद इस पूरे राजस्थान में इसी साल से लागू किए जाने की तैयारी की गई. इसके लिए जलदाय विभाग ने प्रोजेक्ट वर्क भी तैयार कर लिया. राज्य के आईटी डिपार्टमेंट से सहमति भी ले ली गई, लेकिन इन सबके बावजूद अभी तक इस सिस्टम को लागू नहीं किया जा सका है. जानकारी के मुताबिक जलदाय विभाग के कई अधिकारी नहीं चाहते कि पानी चोरी पर अंकुश लगे, इस वजह से वह जानबूझकर इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाले हुए हैं.
दबी जुबान लोग चर्चा यह कर रहे हैं कि पानी चोरी के खेल में नीचे से ऊपर तक सबका हिस्सा तय होता है. ऐसे में अगर चोरी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया तो सिस्टम से जुड़े हुए तमाम लोगों को दिक्कत हो सकती है. यही वजह है कि प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डालकर उसमें दिलचस्पी नहीं ली जा रही है। इस बारे में मंत्री समेत सरकार के दूसरे जिम्मेदार लोगों का कहना है कि अभी वह लोग पंचायत चुनाव में व्यस्त हैं. पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद इसे जल्द ही फेज वाइज़ लागू कराया जाएगा। इस साल बारिश कम हुई है, लिहाजा अगले साल पानी की उपलब्धता और बढ़ाई जाएगी. किसी भी हालत में पानी की कमी कतई नहीं होने दी जाएगी और इसकी चोरी भी रोकी जाएगी.
अब देखना यह होगा कि पानी चोरी को रोकने के लिए राजस्थान सरकार अपनी कितनी दिलचस्पी दिखाती है और कितनी जल्दी इसे लागू करती है. वैसे इस सिस्टम को तैयार करने वाली कंपनी का दावा है कि इस पर खर्च सिर्फ नाम मात्र का है. मामूली से खर्चे में इस सिस्टम को लागू किया जा सकता है और रेगिस्तान कहे जाने वाले राजस्थान की प्यास बुझाने के सिस्टम पर डाका डालने वालों पर शिकंजा कसकर लोगों को पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है.
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