जोधपुर: स्कूल में छात्रा की निजता भंग करने पर प्रिंसिपल सस्पेंड, शिक्षा विभाग ने लिया एक्शन
Jodhpur News: शकील अहमद ने छात्रा के अभिभावक को सूचित किए बिना नाबालिग छात्रा से मोबाइल का लॉक खुलवाकर उसमें मौजूद वाट्सएप, इंस्टाग्राम, कॉल डिटेल और गैलरी की जांच की.आरोप स्वीकार भी किया है.

राजस्थान के शिक्षा जगत से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें छात्रा की निजता का उल्लंघन करने के आरोप में जोधपुर के एक विद्यालय के प्रधानाचार्य को निलंबित कर दिया गया है. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने शनिवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है. निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, शकील अहमद (FMP-ID RJJ0201424027237), जो कि वर्तमान में प्रधानाचार्य (कार्यवाहक) पीएम श्री महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जोधपुर सिटी के पद पर कार्यरत थे, उन्होंने विद्यालय की कक्षा 11 में अध्ययनरत एक छात्रा का मोबाइल फोन प्राप्त किया.
आदेश के अनुसार, शकील अहमद ने छात्रा के अभिभावक को सूचित किए बिना नाबालिग छात्रा से मोबाइल का लॉक खुलवाकर उसमें मौजूद वाट्सएप, इंस्टाग्राम, कॉल डिटेल और गैलरी की जांच की. इस संबंध में उन्होंने स्वयं अपने हस्ताक्षर से लिखित अपना पक्ष (स्वीकारोक्ति) भी दी है.
निजता का हनन माना गया गंभीर अपराध
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), जोधपुर द्वारा इस घटना की जांच कर रिपोर्ट निदेशालय को भेजी गई. रिपोर्ट में यह पाया गया कि प्रधानाचार्य द्वारा किया गया यह कृत्य छात्रा की निजता (Privacy) का उल्लंघन है और यह आचरण शिक्षक पद की गरिमा के विपरीत है.
इस रिपोर्ट के आधार पर निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए कार्रवाई की. आदेश में कहा गया कि शकील अहमद का यह आचरण अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है और राजस्थान असैनिक सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 13(1) के तहत उन पर विभागीय जांच प्रारंभ की जाती है.
तत्काल प्रभाव से निलंबन
निदेशालय ने आदेश जारी कर शकील अहमद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय बीकानेर स्थित कार्यालय निदेशक, माध्यमिक शिक्षा रहेगा. उन्हें इस अवधि में निर्वाह भत्ता नियमानुसार देय होगा.
शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. सूत्रों के अनुसार, विभाग इस मामले को एक मिसाल के रूप में देख रहा है ताकि भविष्य में किसी शिक्षक या अधिकारी द्वारा छात्र-छात्राओं की निजता का हनन न किया जा सके.
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