झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से बच्चों की मौत का मामला, HC ने केंद्र-राज्य सरकार से मांगा जवाब
Rajasthan News: हाईकोर्ट इस मामले में 22 अगस्त को सुनवाई करेगा, जिसमें सरकार को यह बताना होगा कि झालावाड़ की घटना क्यों हुई और इसका जिम्मेदार कौन है.

राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल बिल्डिंग गिरने से सात बच्चों की मौत से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की. हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया है.
केंद्र और राजस्थान सरकार को चार दिनों में अपना जवाब दाखिल करना होगा. हाईकोर्ट इस मामले में 22 अगस्त को सुनवाई करेगा. 22 अगस्त को होने वाली सुनवाई में सरकार को यह बताना होगा कि झालावाड़ की घटना क्यों हुई और उसके लिए जिम्मेदार कौन है.
'दोषियों पर क्या हुई कार्रवाई'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ये भी पूछेगा कि सरकार ने दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है. पहले के जो नियम बने हुए हैं उनका पालन क्यों नहीं कराया जा रहा है. इस तरह के क्या कदम उठाए जा रहे हैं कि राज्य में स्कूलों की बिल्डिंग दोबारा ना गिरे और बच्चों की जान ना जाए.
हाईकोर्ट ने इस मामले में दो अधिवक्ताओं को एमिकस क्यूरी यानी न्याय मित्र नियुक्त किया है. इस मामले में हाईकोर्ट के दो जजेज ने सुओ मोटो लेते हुए मामले को सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस को रेफर किया था. चीफ जस्टिस ने स्पेशल बेंच नॉमिनेट कर सुनवाई के लिए मामला उसे रेफर किया है.
अर्जेंट मामला मानते हुए सुनवाई
हाईकोर्ट में इसे अर्जेंट मामला मानते हुए जल्द सुनवाई का फैसला किया है. अदालत में केंद्र और राज्य सरकार के साथ राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग यानी नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स से भी जवाब तलब किया गया है.
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की तरफ से उसके अधिवक्ता वागीश कुमार सिंह कोर्ट में पेश हुए. वागीश कुमार सिंह ने एबीपी न्यूज़ से की गई बातचीत में बताया कि वह अदालत में झालावाड़ के बाद जैसलमेर, उदयपुर और बूंदी समेत अन्य जगहों पर हुए स्कूल हादसों के बारे में भी जानकारी देंगे
बिल्डिंग्स की मॉनिटरिंग के लिए बने कमेटी
22 अगस्त को होने वाली सुनवाई में हाईकोर्ट सख्त दिशा निर्देश जारी कर सकता है. हाईकोर्ट में 14 बिंदुओं पर जवाब तलब किया है. हाईकोर्ट ने सुझाव दिया है कि स्कूल बिल्डिंग्स की मॉनिटरिंग के लिए हर जिले में एक कमेटी गठित की जानी चाहिए.
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Source: IOCL






















