राजस्थान: चेहरा खोलकर पहचान साबित करने के मुद्दे पर विवाद, मुस्लिम संगठन ने किया विरोध
Rajasthan News: चुनाव आयोग के इस फैसले को लेकर मुस्लिम संगठन भी कड़ा विरोध जता रहे हैं. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि यह सीधे तौर पर मुस्लिम महिलाओं को टारगेट करने की कोशिश है.

राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर निकायों और पंचायतों के चुनाव में महिला कर्मचारियों की ड्यूटी नहीं लगाए जाने और पर्दे वाली महिलाओं को चेहरा खोलकर अपनी पहचान साबित करने के मुद्दे पर विवाद और गहरा गया है. कांग्रेस पार्टी के बाद मुस्लिम संगठन भी इस फैसले को लेकर कड़ा विरोध जता रहे हैं. मौलाना महमूद मदनी के संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह बुर्के वाली मुस्लिम महिलाओं को परेशान करने और उन्हें वोट डालने से रोकने की साजिश है.
चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर मनमाने तरीके से काम कर रहा है. चुनाव आयोग इन दिनों बीजेपी का एजेंट बन गया है. संगठन ने कहा कि मुसलमानों के वोट सीमित करने की कोशिश की जा रही है.
जमीयत उलेमा ए हिंद इस फैसले के खिलाफ आंदोलन करेगा और साथ ही अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगा. जमीयत उलेमा ए हिंद के राजस्थान के स्टेट वाइस प्रेसिडेंट हाफिज मंजूर अली का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग को इस फैसले को वापस लेना चाहिए.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश उपाध्यक्ष ने क्या कहा?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश उपाध्यक्ष हाफिज मंजूर अली ने कहा कि यह सीधे तौर पर मुस्लिम महिलाओं को टारगेट करने की कोशिश है. संगठन इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन चलाएगा. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की जाएगी. याचिका दाखिल किए जाने की तैयारी की जा रही है.
हाफिज मंजूर अली के मुताबिक बहुत सारी गैर-मुस्लिम महिलाएं भी घूंघट में रहकर पर्दा करती हैं. लेकिन मुस्लिम महिलाओं की संख्या ज्यादा है.नियम की आड़ में सिर्फ मुस्लिम महिलाओं को ही पोलिंग बूथ पर रोका और परेशान किया जाएगा.
'बीजेपी को फायदा पहुंचाने की कोशिश'
हाफिज मंजूर ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग मुस्लिमों के वोट कम कर बीजेपी को फायदा पहुंचाने की कोशिश में लगा हुआ है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लामी संगठन भी इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहा है और एतराज जता रहा है. उसने भी इसी तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं
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