राजस्थान: जालोर में कड़ाके की ठंड में 108 मटकों से शिव साधना की तपस्या, साध्वी बोलीं- 'हर संत ढोंगी नहीं'
Jalore News: जालोर के भीनमाल स्थित श्री महाकालेश्वर धाम में कड़ाके की सर्दी के बीच महिला साधु राधागिरि महाराज 108 मटकों की ठंडी जलधारा के बीच “ॐ नमः शिवाय” मंत्रोच्चार के साथ शिव आराधना कर रही हैं.

राजस्थान में इन दिनों कड़ाके की ठंड का प्रकोप जारी है. जहां लोग अलाव जलाकर सर्दी से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं जालोर जिले के भीनमाल शहर में एक अद्भुत भक्ति और कठोर साधना का नजारा देखने को मिल रहा है. दरअसल जालोर जिले के भीनमाल में क्षेमंकरी माता मंदिर के पास स्थित श्री महाकालेश्वर धाम में महिला साधु राधागिरि महाराज शनिवार से 11 दिवसीय जलधारा तपस्या कर रही हैं. जो 14 जनवरी तक चलेगी.
इस तपस्या के दौरान वह प्रतिदिन तड़के सुबह लगभग 5 बजे भोर होते ही “ॐ नमः शिवाय” मंत्र के उच्चारण के साथ 108 मटकों से लगातार ठंडा जल शरीर पर अर्पित कर भगवान शिव की आराधना करती हैं. जिसमें 108 मटकों की जलधारा के बीच कठोर साधना की जा रही है.
सुबह 4 बजे उठती हैं और 5 बजे तक करती है मंत्र जाप
साध्वी राधागिरि महाराज ने बताया कि इस कठिन साधना के लिए वह प्रतिदिन सुबह 4 बजे उठती हैं और 5 बजे से लेकर करीब 7 बजे तक लगातार जलधारा के बीच मंत्र जाप करती रहती हैं. इस दौरान पानी से भरे 108 घड़े एक-एक कर बिना रुके उन पर डाले जाते हैं. जिनकी तैयारी रात में ही कर ली जाती है. साध्वी का कहना है कि इस तपस्या का उद्देश्य केवल आत्मशुद्धि नहीं बल्कि समाज को यह संदेश देना है कि हर साधु-संत ढोंगी नहीं होता और तप के बल से ही व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त करता है.
महाकालेश्वर धाम के महंत नवीनगिरि महाराज ने बताया कि राधागिरि महाराज की यह तपस्या जनकल्याण और लोकमंगल के लिए है तथा श्री महाकालेश्वर धाम में वर्षों से चली आ रही भक्ति, सेवा और साधना की परंपरा का ही हिस्सा है. 4 जनवरी को तपस्या के दूसरे दिन जैसे ही जलधारा शुरू हुई. पूरा मंदिर परिसर “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गूंज उठा और इस अद्भुत साधना को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकालेश्वर धाम पहुंचकर दर्शन का लाभ ले रहे हैं.
हर साधु-संत ढोंगी नहीं होता- साध्वी
साध्वी राधागिरि का कहना है कि इस तपस्या का उद्देश्य केवल आत्मशुद्धि नहीं बल्कि समाज को यह संदेश देना है कि हर साधु-संत ढोंगी नहीं होता और तप के बल से ही व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त करता है. उन्होंने बताया कि कठिन तपस्या और साधना से लोगों की आस्था जुड़ी रहे और लोगों की आस्था साधु-संतों के प्रति भी आस्था के साथ विश्वास हमेशा कायम रहे. उन्होंने बताया कि साधु-संत ढोंगी नहीं होता है और तप बल से ही व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए शक्तियों को प्राप्त कर सकता है.
रिपोर्ट- एच.एल.भाटी
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