जयपुर के SMS अग्निकांड में चौंकाने वाला खुलासा, अधिकारी ने 50 दिन पहले कर दिया था आगाह
Jaipur Hospital Fire: अस्पताल में आग की घटना के दो दिन बीत चुके हैं और अभी तक हादसे की वजह साफ नहीं हो सकी है. सवाल ये है कि बड़े लोगों की जवाबदेही कब तय की जाएगी और उनके खिलाफ एक्शन कब लिया जाएगा.

जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटना को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. एबीपी न्यूज़ के पास एक्सक्लूसिव तौर पर कई ऐसे लेटर मौजूद है जिनसे यह साफ होता है कि हॉस्पिटल में आग लगने की घटना महज हादसा नहीं बल्कि सीधे तौर पर लापरवाही है. पिछले 50 दिनों में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और हॉस्पिटल के सुपरिंटेंडेंट को ट्रॉमा सेंटर के नोडल ऑफिसर डॉक्टर अनुराग धाकड़ व दूसरे जिम्मेदार लोगों ने पत्र लिखा था.
इस पत्र में उन्होंने इलेक्ट्रिक सप्लाई व्यवस्था को लेकर खतरा बताया था और साफ तौर पर लिखा गया था कि अगर वक्त रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो मरीजों और डॉक्टर्स की जिंदगी को खतरा हो सकता है.
पत्र में अव्यवस्थाओं का जिक्र
ट्रॉमा सेंटर के नोडल ऑफिसर ने एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में लेटर भेजे जाने की पुष्टि की और कैमरे पर कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि दुर्घटना की किसी भी संभावना को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए. लेटर में साफ तौर पर लिखा हुआ है कि व्यवस्थाएं ठीक नहीं की गई तो कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है.
'बनाया जा रहा बली का बकरा'
बातचीत में भी उन्होंने यह माना है कि जो भी शिकायतें की गई थी उन्हें दूर नहीं किया गया. अगर उचित कदम उठाए जाते तो बार-बार लेटर भेजने की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि आवाज उठाने के बाद भी ऊपर के लेवल पर कार्रवाई नहीं किए जाने के बावजूद उन्हें पद से हटा दिया गया है. इस बारे में उनका कहना है कि यह सरकार का फैसला है लेकिन उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बार-बार लेटर लिखा था. ऐसे में सवाल यह है कि क्या सरकार ने आईना दिखाने वाले को ही बलि का बकरा बना दिया.
'खराब हालत देखकर डर लगता है'
ट्रॉमा सेंटर में कई जगहों पर फाल्स सीलिंग टूटी हुई है. छतों से पानी टपकता रहता है. प्लास्टर उखड़े हुए हैं और बिजली के तार खुले में दौड़ रहे हैं. ग्राउंड फ्लोर पर एक्स-रे रूम के सामने की फाल्स सीलिंग टूटी हुई है. ट्रॉमा सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियो का भी कहना है कि उन्हें इस हालत को देखकर डर लगता है और खामियों की वजह से उनके काम करने पर असर पड़ता है.
अभी तक हादसे की वजह साफ नहीं
अस्पताल में आग की घटना के दो दिन बीत चुके हैं और अभी तक हादसे की वजह साफ नहीं हो सकी है. अभी तक ना तो जांच कमेटी की शुरुआती रिपोर्ट आई है और ना ही एफएसएल और फायर डिपार्टमेंट की. कुछ लोगों को पद से हटा दिया गया है लेकिन अभी तक बड़े लोगों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय नहीं की गई है.
बड़े लोगों की जवाबदेही कब होगी तय?
सवाल यह है कि अगर कुछ लोगों को पद से हटाया गया है और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड किया गया है तो बड़े लोगों की जवाबदेही कब तय की जाएगी और उनके खिलाफ एक्शन कब लिया जाएगा.
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Source: IOCL

























