खामनेई के ताबूत पर क्यों रखी गई काली पगड़ी? जानें क्या है इस्लामी परंपरा में इसके मायने
Khamenei Funeral: ईरान में आयतुल्लाह खामेनेई का 4 महीने बाद अंतिम संस्कार चल रहा है. यहां लोग लाल कपड़े पेश कर रहे हैं, जो बदले का प्रतीक है. 6 दिन की रस्म में करीब 2 करोड़ लोग पहुंच सकते हैं.

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार चार महीने की देरी के बाद इन दिनों तेहरान समेत विभिन्न शहरों में इस्लामी परंपराओं के अनुसार चल रहा है. फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल युद्ध के शुरुआती हमलों में उनकी शहादत के बाद सुरक्षा कारणों से यह देरी हुई. लाखों-करोड़ों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए जुट रहे हैं, जहां लाल कपड़े अर्पित करने की परंपरा बदले की भावना को दर्शा रही है.
जयपुर के इस्लामिक विद्वान और शिया जामा मस्जिद के इमाम सैयद नाजिश अकबर काजमी के अनुसार, इस्लाम में लाल रंग खून के बदले खून की मांग का प्रतीक है. दुनिया भर से पहुंचे श्रद्धालु खामेनेई के जनाजे पर प्लेन लाल कपड़े या उन पर अरबी-अंग्रेजी में संदेश लिखे लाल कपड़े चढ़ा रहे हैं. वे लाल झंडे लहरा रहे हैं और लाल वस्तुएं लेकर आ रहे हैं. काजमी कहते हैं कि लोग उनकी हत्या का बदला चाहते हैं और खून का बदला खून की इस्लामी परंपरा को याद दिला रहे हैं.
जयपुर: पहली बारिश में ही धंस रहीं सड़कें, मानसरोवर में गड्ढे में गिरी कार
काला रंग: शोक और विरोध का प्रतीक
श्रद्धालु मुख्य रूप से काले कपड़ों में आ रहे हैं, जो शोक के साथ-साथ विरोध भी व्यक्त कर रहा है. ताबूत पर खामेनेई द्वारा पहनी गई काली पगड़ी रखी गई है, जो उनकी विद्वता का प्रतीक थी. आलिमों को ही इस्लामी परंपरा में ऐसी पगड़ी पहनने का अधिकार होता है. साथ ही ईरान का राष्ट्रीय ध्वज भी ताबूत पर लगाया गया है, क्योंकि वे देश के सर्वोच्च नेता थे.
दुनिया से दो करोड़ से ज्यादा लोगों के पहुंचने की उम्मीद
अंतिम संस्कार की रस्में 6 दिनों तक चल रही हैं, जिसमें जनाजे की नमाज कई बार पढ़ाई जा रही है. काजमी के मुताबिक, खामेनेई आठवें इमाम की परंपरा से जुड़े थे, इसलिए वे सिर्फ राजनेता नहीं बल्कि धर्मगुरु और रहबर भी थे. पूरी दुनिया से दो करोड़ से ज्यादा लोगों के पहुंचने की उम्मीद है. तेहरान, कोम, नजफ, कर्बला होते हुए अंतिम दफन मशहद में होगा.
महिलाओं की बड़ी भागीदारी, सुरक्षा कारणों से बेटे गायब
काजमी ने बताया कि बड़ी संख्या में महिलाएं भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रही हैं, जो खामेनेई पर महिलाओं के प्रति कट्टरता के आरोपों को गलत साबित करती है. उन्होंने ईरान में महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया. उत्तराधिकारी बेटे मोज्तबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक रूप से नहीं दिख रहे हैं, जबकि अन्य बेटे मौजूद हैं. दुनिया भर में शोक और प्रतिक्रियाएं
ईरान के अलावा शिया समुदाय दुनिया भर में शोक मना रहा है. जयपुर सहित कई जगहों पर ईद की खुशी भी प्रभावित हुई थी. अंतिम संस्कार में 'Death to America' और बदले के नारे लग रहे हैं. यह आयोजन ईरानी व्यवस्था की मजबूती और एकजुटता का प्रदर्शन कर रहा है.
परंपराओं का पूर्ण पालन
सभी रस्में इस्लामी शिया परंपरा के मुताबिक अदा हो रही हैं. चार महीने की देरी युद्ध और सुरक्षा के कारण हुई, लेकिन अब पूरी दुनिया उनके योगदान को याद कर रही है. खामेनेई को विद्वान, रहबर और मजबूत नेता के रूप में याद किया जा रहा है. यह घटना न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे इस्लामी दुनिया के लिए भावनात्मक और राजनीतिक महत्व रखती है. लाल और काले रंगों का मेल शोक, सम्मान और प्रतिरोध की मिश्रित भावना को उजागर कर रहा है.
जयपुर में निर्माणाधीन बिल्डिंग की छत गिरी, 10 मजदूर घायल, SMS अस्पताल में भर्ती























