Jagdeep Dhankhar: जगदीप धनखड़ पहली बार राजस्थान से बने लोकसभा सांसद, ऐसा रहा है सियासी सफर
Jagdeep Dhankhar Resigns: जगदीप धनखड़ ने सोमवार (21 जुलाई) को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ने का फैसला किया.

उपराष्ट्रपति जनदीप धनखड़ ने सोमवार (21 जुलाई) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनका कार्यकाल 2027 तक था. स्वास्थ्य कारणों की वजह से उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया. 11 अगस्त 2022 को उपराष्ट्रपति बने थे. अपने पॉलिटिकल कैरियर की शुरुआत उन्होंने बतौर लोकसभा सांसद के रूप में की थी. राजस्थान की झुंझुनू सीट से उन्होंने 1989 का लोकसभा चुनाव जीता था.
1993 में बने विधायक
1990 में वो संसदीय कार्य राज्य मंत्री बने. 1993 में अजमेर जिले के किशनगढ़ सीट से विधायक चुने गए. 30 जुलाई 2019 से 18 जुलाई 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे. 1988 में राजस्थान बार काउंसिल के अध्यक्ष बने.
राजस्थान विश्वविद्यालय से ली एलएलबी की डिग्री
राजस्थान विश्वविद्यालय के महाराजा कॉलेज से बीएससी (ऑनर्स) फिजिक्स में ग्रेजुएट हुए. 1978-1979 राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की.
18 मई 1951 को झुंझुनू में जन्म
जाट समुदाय से ताल्लुक रखने वाले जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को झुंझुनू जिला के किठाना में हुआ. 1979 में उनकी शादी सुदेश धनखड़ से हुई. उनकी एक बेटी है जिनका नाम कामना है.
संसद सत्र के पहले दिन क्या कहा?
सोमवार को ही राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने राजनीतिक दलों से तनाव कम करने और सौहार्दपूर्ण वातावरण को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि एक समृद्ध लोकतंत्र निरंतर टकराव की स्थिति में टिक नहीं सकता.
'राजनीति का सार टकराव नहीं, संवाद है'
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन उच्च सदन की बैठक में सभापति ने कहा, 'राजनीति का सार टकराव नहीं, संवाद है. अलग-अलग राजनीतिक दल भले ही अलग रास्तों से चलें, लेकिन सभी का लक्ष्य देशहित ही होता है. भारत में कोई भी राष्ट्र के हितों का विरोध नहीं करता.'
'संवाद और विमर्श भारत की ऐतिहासिक शक्ति रही है'
इसके साथ ही उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ अशोभनीय भाषा और व्यक्तिगत हमलों से परहेज करने की अपील करते हुए कहा कि 'टेलीविजन या अन्य मंचों पर असभ्य व्यवहार हमारी सभ्यता के मूल स्वरूप के विपरीत है.' राज्यसभा के 268वें सत्र के अवसर पर उच्च सदन में सभापति ने कहा 'संवाद और विमर्श भारत की ऐतिहासिक शक्ति रही है, और यही हमारे संसद की कार्यप्रणाली का मार्गदर्शक होना चाहिए.'
'आंतरिक संघर्ष देश के शत्रुओं को बल देता है'
जगदीप धनखड़ ने कहा कि आंतरिक संघर्ष देश के शत्रुओं को बल देता है और ‘‘हमारे बीच फूट डालने के लिए सामग्री उपलब्ध कराता है.’’ उन्होंने राजनीतिक दलों से रचनात्मक राजनीति में भाग लेने का अनुरोध करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग और सक्रिय सहभागिता से यह मानसून सत्र उत्पादक और सार्थक सिद्ध होगा.
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