India vs Pakistan मैच रद्द करने की मांग, पहलगाम हमले का जिक्र कर शिवसेना ने किया प्रदर्शन
IND vs PAK Asia Cup 2025: जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले के बाद, शिवसेना (UBT) कार्यकर्ताओं ने दुबई में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच रद्द करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया.

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर फूट पड़ा. रविवार (14 सितंबर) को दुबई में होने वाले भारत-पाकिस्तान मैच को रद्द करने की मांग को लेकर शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ता जालोर कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे. शिवसेना जिला प्रमुख रूपराज पुरोहित के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा.
शिवसेना जिला प्रमुख रूपराज पुरोहित ने ज्ञापन में कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में कुछ महीने पहले हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. आतंकियों ने न केवल भारत के बहादुर जवानों को निशाना बनाया बल्कि निर्दोष पर्यटकों की भी हत्या की. इस घटना को देशवासी आज तक नहीं भूल पाए हैं. उस समय प्रधानमंत्री ने भी कई मंचों से साफ कहा था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.” इसी नीति के तहत सरकार ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने जैसे सख्त कदम भी उठाए थे, जिसे जनता ने राष्ट्रहित में सराहा.
जालोर शिवसेना के कार्यकर्ता उतरे सड़क पर
अब जब दुबई में भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच आयोजित किया जा रहा है, तो सवाल उठ रहे हैं कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते तो खून और क्रिकेट कैसे साथ चल सकते हैं. इसी नाराजगी को लेकर जालोर शिवसेना के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे.
'पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना है भारतीय अस्मिता के खिलाफ'
इस विरोध में महिलाओं ने भी भागीदारी निभाई. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को सिंदूर से भरा लिफाफा भेजकर यह संदेश दिया कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना भारतीय अस्मिता के खिलाफ है. महिलाओं ने कहा कि जब तक पाकिस्तान भारत में खून बहाना बंद नहीं करता, तब तक उसके साथ किसी भी तरह का खेल या सांस्कृतिक संबंध स्वीकार्य नहीं होना चाहिए.
शिवसैनिकों ने की जमकर नारेबाजी
विरोध प्रदर्शन के दौरान शिवसैनिकों ने जमकर नारेबाजी की और केंद्र सरकार से मांग की कि भारत-पाकिस्तान का मैच रद्द किया जाए. कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह केवल खेल का मामला नहीं है, बल्कि शहीदों और आतंकवाद से प्रभावित परिवारों की भावनाओं का सवाल है.






















