Rajasthan: 30 मई को धूमधाम से मनाया जाएगा गंगा दशहरा, इस दिन हुआ था पवित्र नदी का धरती पर अवतरण
Bharatpur: गंगा दशहरा 30 मई को मनाया जाएगा. मान्यता है की इस दिन गंगा नदी का धरती पर अवतरण हुआ था. राजा भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने धरती पर आने का उनका आग्रह स्वीकार किया था.

Ganga Dussehra 2023: भरतपुर (Bharatpur) के गंगा माता मंदिर (Ganga Maa Temple) में 30 मई को बड़े ही धूम - धाम से गंगा दशहरा मनाया जाएगा. भरतपुर के गंगा माता मंदिर के पुजारी चेतन शर्मा ने बताया है की पापों को हरने और मोक्ष प्रदान करने के लिए गंगा मां धरती पर अवतरित हुई थी. गंगा दशहरा के पर्व के दिन मंदिर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. सुबह गंगा माता का पंचामृत दूध, दही, शहद, घी और बूरा से अभिषेक किया जाएगा. इसके बाद पंचामृत का प्रसाद वितरण किया जाएगा.
भरतपुर में भी गंगा मैया को बड़ी ही श्रद्धा भाव से पूजा जाता है. यूं तो देश में हर जगह देवी देवता के मंदिर बहुत मिल जाते है, लेकिन गंगा माता का मंदिर कहीं - कहीं ही देखने को मिलता है. उत्तर भारत में एक मात्र गंगा माता का मंदिर भरतपुर में है. भरतपुर के ऐतिहासिक गंगा मंदिर का निर्माण महाराजा बलवंत सिंह ने शुरू कराया था. बताया जाता है कि, महाराजा बलवंत सिंह के कोई संतान नहीं थी. एक दिन महाराजा बलवंत सिंह हरिद्वार गए.
महाराजा बलवंत सिंह ने मांगी थी मन्नत
वहां उन्होंने गंगा माता से मन्नत मांगी थी की मां मेरी कोई संतान नहीं है, अगर मेरे घर संतान पैदा होगी, तो मैं भरतपुर में आपका मंदिर बनवाऊंगा. गंगा मां ने महाराजा बलवंत सिंह की पुकार सुनी और उनके घर पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम जसवंत सिंह रखा गया. उसके बाद महाराजा बलवंत सिंह ने भरतपुर में गंगा मां के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य 1845 में शुरू कराया. मंदिर निर्माण का कार्य महाराजा बलवंत सिंह की पांच पीढ़ियों तक चलता रहा.
देवस्थान विभाग करता है देख-रेख
जब मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो गया, तो भरतपुर के अंतिम शासक महाराजा बृजेन्द्र सिंह ने 22 फरवरी 1937 को इस मंदिर में माता गंगा की मूर्ति को पदस्थापित कराया था. गंगा माता के मंदिर का निर्माण कराते समय महाराजा बलवंत सिंह ने बहुत आगे की सोची और उसी हिसाब इसका निर्माण कराया था. मंदिर के मुख्यद्वार को छोड़कर इसके चारों तरफ दुकानें हैं. ये मंदिर अब राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग की देखरेख में है. मंदिर के पुजारी की तन्ख्वाह देवस्थान विभाग देता है. साथ ही यहां जो भी प्रोग्राम आयोजित होते हैं, सब देवस्थान विभाग की देखरेख में होते हैं.
इसलिए मनाया जाता है गंगा दशहरा
मान्यता है की इस दिन पवित्र गंगा नदी का धरती पर अवतरण हुआ था. राजा भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने धरती पर आने का उनका आग्रह स्वीकार किया था. मांं गंगा ज्येष्ठ शुक्ल की दशमी के दिन हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं. इसलिए इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है.
Rajasthan: उदयपुर के सुदूर गांवों को जल्द मिलेगी 4G सर्विस, BSNL लगाएगी 197 टावर
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















