'पहले सत्यपाल मलिक और अब जगदीप धनखड़', कांग्रेस नेता दिव्या मदेरणा ने सरकार पर कह दी बड़ी बात
Jagdeep Dhankhar News: कांग्रेस की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने कहा कि 75 सालों के इतिहास में पहली बार कोई उपराष्ट्रपति इस तरीके से जा रहा है. किसान वर्ग इसको अपमानित रूप में देखता है.

उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर राजनीति प्रतिक्रियाओं की कतार लंबी होती जा रही है. इस बीच राजस्थान कांग्रेस की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने भी अपनी बात रखी. केंद्र सरकार को सवाल के घेरे में खड़ा करते हुए उन्होंने पूछा कि क्यों इस सरकार के अंदर किसान के बेटों के साथ ऐसा होता है? पहले हमने सत्यपाल मलिक को देखा अब जगदीप धनखड़ को देखा. जहां तक स्वास्थ्य का सवाल है तो हम सब प्रार्थना करते हैं कि वो अच्छा रहे. लेकिन इतना गंभीर स्वास्थ्य भी नहीं था.
'अन्नदाता की आवाज वो हमेशा से उठाते रहे हैं'
दिल्ली में न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में दिव्या मदेरणा ने कहा, "जगदीप धनखड़ मेरे पिता के बहुत करीबी मित्र हैं. मैं बचपन में उनको देखती आई हूं. एक पारिवारिक रिश्ता उनसे रहा है. किसान वर्ग के वो बेटे हैं, मैं किसान समाज से आती हूं. अन्नदाता की आवाज वो हमेशा से उठाते रहे हैं. जैसे शिवराज सिंह चौहान को उन्होंने किस तरीके से पूछा कि क्यों ये किसान बार-बार आंदोलित हो रहा है. क्यों इनकी सुनी नहीं जा रही है."
- 21 जुलाई को जगदीप धनखड़ ने पद से इस्तीफा दिया
- इस्तीफे में स्वास्थ्य का हवाला दिया
- 22 जुलाई को इस्तीफा स्वीकार हुआ
- राजनीतिक बयानबाजी जारी है
- राजस्थान से पहली बार सांसद बने थे
- बाद में विधायक भी बने
'किसान वर्ग के अंदर एक दुख की लहर है'
इसके आगे उन्होंने कहा, "वो एक ऐसे पद पर थे जिससे समस्त किसानों का सीना फूलकर गौरवान्वित होता था. आज मुझे लगता है कि समस्त राजस्थान और पूरे किसान वर्ग के अंदर एक दुख की लहर है. दुख भरा क्षण है. बहुत मायूसी है और अन्नदाताओं के आंख में नमी सी होगी कि उनका एक बेटा और सपूत इस पद पर आसीन था."
'किसान वर्ग इसको अपमानित रूप में देखता है'
दिव्या मदेरणा ने आगे कहा, "इससे कहीं ज्यादा आश्चर्यजनक रूप से उनका इस्तीफा हुआ, तुरंत मंजूर हुआ हो गया. उन्होंने कोई अपना फेयरवेल स्पीच नहीं दिया. निश्चित रूप से दिखाता है कि सरकार का कोई दबाव या तंत्र था. 75 सालों के इतिहास में पहली बार कोई उपराष्ट्रपति इस तरीके से जा रहा है. किसानवर्ग इससे बहुत आहत है. इसको अपमानित रूप में देखता है."
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