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जयपुर निकाय चुनाव में BJP को स्पष्ट बहुमत, कांग्रेस से डेढ़ गुना से ज्यादा वार्ड जीते

जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने 78 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया. कांग्रेस को बीजेपी से 13,135 ज्यादा वोट मिले, लेकिन सीटों के मामले में बीजेपी आगे रही.

राजधानी जयपुर में नगर निगम चुनाव के नतीजे काफी दिलचस्प रहे हैं. यहां कांग्रेस को बीजेपी से ज्यादा वोट मिले हैं, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम में बोर्ड बीजेपी का बनना तय हो गया है. 150 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 76 पार्षदों की जरूरत है, जबकि बीजेपी 146 घोषित वार्डों में ही 78 सीटें जीत चुकी है. वहीं कांग्रेस के खाते में 53 वार्ड गए हैं. 15 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है. अभी 4 वार्डों के 5 बूथों पर दोबारा मतदान होना बाकी है. इसके बाद चुनाव की अंतिम तस्वीर पूरी तरह साफ होगी.

अगर कुल वोटों की बात करें तो कांग्रेस को 5,65,848 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 5,52,713 वोट मिले. यानी कांग्रेस ने बीजेपी से 13,135 ज्यादा वोट हासिल किए. वोट शेयर में भी कांग्रेस मामूली रूप से आगे रही. कांग्रेस का वोट शेयर 38.51 प्रतिशत और बीजेपी का 37.62 प्रतिशत रहा. दोनों के बीच सिर्फ 0.89 प्रतिशत अंक का अंतर है.

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कांग्रेस की बड़ी जीतों ने बढ़ाया कुल वोट

अब सवाल है कि जब कांग्रेस को ज्यादा वोट मिले तो फिर बीजेपी ज्यादा सीटें कैसे जीत गई? इसका एक बड़ा कारण कुछ वार्डों में कांग्रेस की बड़े अंतर से हुई जीत है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस की सबसे बड़ी जीत वार्ड नंबर 113 में गजनफर अली की रही.

उन्होंने 10,014 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. इसके बाद वार्ड 126 में सोफिया बानो ने 7,153 वोट, वार्ड 125 में मंजो बानो ने 6,704 वोट, वार्ड 129 में महेश सामरिया ने 5,355 वोट और वार्ड 116 में संजीदा ने 5,310 वोट से जीत हासिल की.

इन बड़ी जीतों का सीधा असर कांग्रेस के कुल वोटों पर पड़ा. यानी कांग्रेस कुछ वार्डों में बहुत बड़े अंतर से जीती, जिससे उसके कुल वोटों की संख्या बढ़ गई. लेकिन दूसरी तरफ कई वार्डों में बीजेपी ने कम अंतर से जीत हासिल कर सीटों की संख्या बढ़ा ली.

6 वार्डों में ही कांग्रेस को 37 हजार से ज्यादा की बढ़त

इस चुनाव का एक और अहम पहलू 6 मुस्लिम उम्मीदवारों के जीतने वाले वार्ड हैं. इन 6 वार्डों में कांग्रेस की कुल बढ़त 37,244 वोट बताई गई है. यह आंकड़ा कांग्रेस की कुल 13,135 वोटों की बढ़त को समझने में काफी अहम है.

बीजेपी की जीत का दूसरा बड़ा कारण कई वार्डों में कम अंतर से मिली जीत रही. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी ने बड़ी संख्या में ऐसे वार्ड जीते, जहां हार-जीत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं था.

कुल 43 वार्ड ऐसे रहे, जहां जीत का अंतर 500 वोट से कम रहा. वहीं 74 वार्डों में जीत का अंतर 1,000 वोट से कम रहा. इसका मतलब साफ है कि बीजेपी कई वार्डों में मामूली बढ़त लेकर भी सीट अपने नाम करने में कामयाब रही.

इसका सबसे दिलचस्प उदाहरण वार्ड नंबर 124 है. यहां कांग्रेस की कांता देवी महज 5 वोट के अंतर से बीजेपी की मनभरी को हराने में सफल रहीं. कांता देवी को 4,277 वोट मिले, जबकि बीजेपी की मनभरी को 4,272 वोट मिले.

मुस्लिम बहुल वार्डों में बीजेपी की चुनौती

चुनाव में बीजेपी ने मुस्लिम बहुल इलाकों को ध्यान में रखते हुए 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को भी टिकट दिया था. हालांकि इनमें से कोई भी उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सका. कई उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई.

दूसरी तरफ जिन वार्डों में कांग्रेस, एमआईएम और निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, वहां बीजेपी कई जगह काफी कम वोटों तक सिमट गई. यही वजह है कि इन वार्डों में बीजेपी को अपेक्षित वोट नहीं मिल पाए.

हालांकि यह कहना ज्यादा सही होगा कि बीजेपी की कुल वोट संख्या पर इन वार्डों का असर पड़ा, जबकि सीटों के लिहाज से पार्टी ने दूसरे कई वार्डों में मामूली अंतर की जीत के जरिए अपना बहुमत हासिल कर लिया.

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परिसीमन ने भी बदला चुनाव का गणित

जयपुर नगर निगम चुनाव में नया परिसीमन और अलग-अलग वार्डों में मतदाताओं की संख्या का अंतर भी काफी अहम रहा. हर वार्ड में मतदाताओं की संख्या एक जैसी नहीं होने की वजह से किसी पार्टी को कुल वोट ज्यादा मिलने के बावजूद सीटें कम मिल सकती हैं. जयपुर के इस चुनाव में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. कांग्रेस को पूरे निगम में बीजेपी से ज्यादा वोट मिले, लेकिन बीजेपी ज्यादा वार्ड जीतने में सफल रही.

मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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