‘हमारा CM कैसा हो…’, गहलोत ने रोका नारा तो BJP ने घेरा, पूछ दिया ये सवाल
बीकानेर की सभा में अशोक गहलोत को लेकर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की. वहीं गहलोत ने नारेबाजी रोक दी. अब बीजेपी ने इस पर तंज कसा है.

राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट के बीच छिड़ी वर्चस्व की जंग किसी से छिपी नहीं है. दो दिन पहले बीकानेर की जनसभा में हुई नारेबाजी को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भले ही कार्यक्रम में ही कार्यकर्ताओं को टोककर एक अलग संदेश देने की कोशिश की हो, लेकिन अब इस मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है.
बीजेपी ने सियासी तंज कसते हुए कहा है कि अशोक गहलोत को पार्टी के दूसरे नेताओं की नाराजगी का डर है. इसी वजह से उन्होंने कार्यकर्ताओं को नारेबाजी करने से रोक दिया था. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने कहा है कि गहलोत को अब अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व दूसरे नेताओं से डर लगने लगा है, इसीलिए वह बैक फुट पर हैं और कार्यकर्ताओं को नारे लगाने से रोक रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि कुछ दिन पहले भी उन्होंने इसी तरह से कार्यकर्ताओं को नारे लगाने से रोकने का काम किया था. मदन राठौड़ का कहना है कि कांग्रेस के नेता एक दूसरे को ही पछाड़ने की कोशिश करते रहते हैं.
'हमारा सीएम कैसा हो अशोक गहलोत जैसा हो' के लगे नारे
बीकानेर की सभा में पूर्व सीएम अशोक गहलोत जब भाषणबाजी कर रहे थे तो उन्होंने यह कहा कि आप लोगों के आशीर्वाद से मैं तीन बार सीएम रह चुका हूं. इस पर कार्यकर्ताओं ने चौथी बार गहलोत सरकार और 'हमारा सीएम कैसा हो अशोक गहलोत जैसा हो' के नारे लगाने शुरू कर दिए.
इस पर अशोक गहलोत ने तुरंत ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को टोका और कहा कि सीएम बनने के लिए अकेले उनका नाम लेकर नारेबाजी ना की जाए. गहलोत ने मंच से कहा था कि इस तरह की नारेबाजी से गलतफहमी होती है. सीएम कौन बनेगा, यह पार्टी हाईकमान सोनिया-राहुल और प्रियंका ही तय करेंगे.
अशोक गहलोत ने मामले पर दी सफाई
अशोक गहलोत ने बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भी इस मामले में सफाई दी थी. उन्होंने लिखा कि सीएम पद को लेकर व्यक्तिगत नारेबाजी ठीक नहीं है. कार्यकर्ताओं को चौथी बार गहलोत सरकार के बजाय अगली बार कांग्रेस सरकार का नारा लगाना चाहिए. सरकार कांग्रेस की बननी चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा है कि तीन बार सीएम रह लेना कोई कम बड़ी बात नहीं होती है. माना यह जा रहा है कि अशोक गहलोत ने कार्यकर्ताओं को टोककर एक संदेश देने की कोशिश की है. इसके जरिए वह यह संदेश देना चाहते हैं कि वह अपने लिए नहीं बल्कि पार्टी के लिए सक्रिय होकर काम कर रहे हैं और पार्टी में किसी तरह की खींचतान नहीं है.
ऐसे में कहा जा सकता है कि अशोक गहलोत के इस नए कदम को लेकर राजस्थान में सियासी हलचल तेज है. लोग अपने-अपने तरीके से इसके सियासी मायने निकाल रहे हैं. कहा जा सकता है कि अशोक गहलोत विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में मची खींचतान को खत्म करने का संदेश देने की कोशिश में है. पिछले दिनों बड़े नेताओं के साथ हुई बैठक में भी उन्होंने इसी तरह की बयानबाजी की थी.
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