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राजस्थान: अरावली संरक्षण पदयात्रा का आगाज, माउंट आबू से शुरू हुई 1000 किलोमीटर की पैदल 'जनयात्रा'

Aravalli Foot March: अरावली संरक्षण पदयात्रा का औपचारिक शुभारंभ निर्मल चौधरी द्वारा किया जाएगा. माउंट आबू सहित आसपास के क्षेत्रों में पदयात्रा को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह है.

अरावली संरक्षण पदयात्रा का आगाज बुधवार (24 दिसंबर) से हो गया है. अरावली पर्वतमाला के संरक्षण, अवैध खनन पर रोक और पर्यावरण बचाने के उद्देश्य से एक बड़े जनआंदोलन की शुरुआत माउंट आबू से हो रही है. अरावली संरक्षण पदयात्रा का औपचारिक शुभारंभ निर्मल चौधरी द्वारा किया जाएगा.

यह पदयात्रा न केवल राजस्थान बल्कि अन्य प्रदेशों में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर जनजागरूकता का संदेश देने का प्रयास करेगी. यात्रा के माध्यम से करीब 1000 किलोमीटर लंबी पैदल जनयात्राका आह्वान किया गया है.

माउंट आबू से शुरू हुई पदयात्रा

अरावली के सबसे ऊंचे पर्वतीय शहर माउंट आबू स्थित अर्बुदा देवी मंदिर से इस पदयात्रा की शुरुआत हुई. यह स्थान ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि राजस्थान में अरावली पर्वतमाला की शुरुआत भी इसी क्षेत्र से होती है, ऐसे में पदयात्रा का शुभारंभ अर्बुदा देवी मंदिर से किया जाना प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

नगर भ्रमण के बाद आबूरोड के लिए रवाना हुई यात्रा

कार्यक्रम के अनुसार पदयात्रा के शुभारंभ के बाद यात्रा ने माउंट आबू नगर क्षेत्र में भ्रमण किया. नगर भ्रमण के दौरान स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से संवाद किया जाएगा. इसके पश्चात पदयात्रा पैदल आबूरोड के लिए रवाना हुई.

आयोजकों के अनुसार यह यात्रा चरणबद्ध रूप से विभिन्न जिलों, कस्बों और गांवों से होकर गुजरेगी, जहां आमजन को अरावली के महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया जाएगा.

यात्रा से अरावली बचाओ का दिया जाएगा संदेश

पदयात्रा के संयोजक निर्मल चौधरी ने बताया कि अरावली पर्वतमाला न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए जीवनरेखा है. अरावली के कारण ही भूजल संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु संतुलन संभव हो पाता है.

लेकिन बीते वर्षों में अवैध खनन, अतिक्रमण और अनियंत्रित विकास के चलते अरावली को गंभीर नुकसान पहुंचा है. इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य आमजन को इस खतरे से अवगत कराना और सरकार व प्रशासन पर अरावली संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बनाना है.

सामाजिक संगठनों का मिलेगा समर्थन

अरावली संरक्षण पदयात्रा को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों, पर्यावरणविदों, जनप्रतिनिधियों और युवाओं में उत्साह देखा जा रहा है. कई संगठनों ने पदयात्रा को समर्थन देने की घोषणा की है. आयोजकों का दावा है कि यात्रा के दौरान जगह-जगह सभाएं, संवाद कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आंदोलन से जुड़ सकें.

ऐतिहासिक आंदोलन बनने की उम्मीद

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के जनआंदोलन निरंतर और व्यापक स्तर पर होते रहेंतो इससे नीति निर्धारण पर भी असर पड़ता है. अरावली संरक्षण पदयात्रा को भी एक ऐतिहासिक जनआंदोलन के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

यात्रा में स्थानीय लोगों में दिखा उत्साह

माउंट आबू सहित आसपास के क्षेत्रों में पदयात्रा को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह है. बड़ी संख्या में लोग अर्बुदा देवी मंदिर पहुंचकर यात्रा के शुभारंभ में शामिल हुए. लोगों का कहना है कि अरावली उनके जीवन, पानी और पर्यावरण से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है और इसे बचाने के लिए हर नागरिक को आगे आना चाहिए.

अरावली संरक्षण पदयात्रा के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट है कि यदि आज प्रकृति को नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा. ऐसे में यह पदयात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति बचाने की सामूहिक पहल के रूप में देखी जा रही है.

Input By : तुषार पुरोहित
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