फारूक अब्दुल्ला से नाराज अजमेर दरगाह के दीवान, पाकिस्तान को घेरा
अजमेर दरगाह के सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने फारुख अब्दुल्ला के बयान पर ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि उनको पाकिस्तान के प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयान पर अब अजमेर दरगाह से भी विरोध की आवाज उठी है. अजमेर दरगाह के उत्तराधिकारी दीवान और ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पाकिस्तान को लेकर उनकी सोच बदलने की जरूरत बताई है.
सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया है. आतंकवाद की वजह से कश्मीर में निर्दोष लोगों की जान गई और भारतीय सुरक्षा बलों के जवानों ने भी अपनी जान की कुर्बानी दी, ऐसे में पाकिस्तान को मददगार के तौर पर देखना उन लोगों के बलिदान को नजरअंदाज करने जैसा है, जिन्होंने आतंकवाद की कीमत अपनी जान देकर चुकाई है.
यह भी पढ़ें: राजस्थान: अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड में 3 और गिरफ्तार, अब तक पकड़े गए 22 आरोपी
पाकिस्तान किसी के लिए मददगार हो सकता है, लेकिन कश्मीर के लिए गुनहगार
चिश्ती ने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर राजनीति करने वाले नेताओं को अपने बयानों में जिम्मेदारी बरतनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की भूमिका को नजरअंदाज करके कश्मीर की वास्तविक परिस्थितियों को समझना संभव नहीं है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान किसी नेता के लिए मददगार हो सकता है, लेकिन कश्मीर के लोगों के लिए वह गुनहगार है. चिश्ती के मुताबिक, आतंकवाद और हिंसा ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को लंबे समय तक प्रभावित किया है और विकास की राह में भी बड़ी बाधाएं खड़ी की हैं.
कश्मीर में लोकतंत्र की वजह से चल रही सरकार
सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने जम्मू-कश्मीर की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चल रही है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री लोकतंत्र की वजह से अपने पद पर हैं, पाकिस्तान की वजह से नहीं.
उन्होंने वर्ष 1947 के बाद से जम्मू-कश्मीर में हुई आतंकवादी घटनाओं का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाया. चिश्ती ने कहा कि आतंकवाद ने न केवल लोगों की जान ली, बल्कि जम्मू-कश्मीर के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी लंबे समय तक प्रभावित किया.
पीओके का जिक्र, कहा- वहां के लोग भी भारत से जुड़ना चाहते हैं
चिश्ती ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि वहां रहने वाले लोग भी भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर के भविष्य की चर्चा करते समय आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
फारूक अब्दुल्ला को अपनी सोच पर पुनर्विचार करना चाहिए
सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने फारूक अब्दुल्ला को पाकिस्तान को लेकर अपनी सोच पर पुनर्विचार करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कारण जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है और जिन जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए शहादत दी है, उनके दर्द को ध्यान में रखते हुए ही ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान दिए जाने चाहिए.
फारूक अब्दुल्ला के बयान के विरोध में अजमेर दरगाह से उठी यह आवाज ऐसे समय में सामने आई है, जब जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान और आतंकवाद को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज है. चिश्ती की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे पर धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से भी बहस को नया आयाम दे दिया है.
यह भी पढ़ें: राजस्थान: युवा नेता नरेश मीणा पर फिर FIR, 8 धाराओं में केस दर्ज





















