Maharashtra News: 'उठते-बैठते 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का सपना...', गिरते शेयर बाजार पर सामना का केंद्र सरकार पर निशाना
Maharashtra News In Hindi: शिवसेना यूबीटी ने 23 मार्च को शेयर बाजार में बड़ी गिरावट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा. सामना में छपे लेख के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण FPI वापस हो रहे.

23 मार्च, सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें सेंसेक्स करीब 1,800 अंकों तक लुढ़क गया और निफ्टी 22 हजार के नीचे आ गया. इस गिरावट से निवेशकों के लगभग 11 लाख करोड़ रुपये डूब गए. यह गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कमजोर रुपये और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण हुई.
वहीं शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ में इस गिरावट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया गया है. संपादकीय का शीर्षक “11 लाख करोड़ का भूकंप… क्या हिल जाएगी सरकार” के साथ सरकार पर तंज कसते हुए इस गिरावट की वजह मिडिल ईस्ट की टेंशन को बताया गया है.
लेख में कहा गया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. ‘सामना’ के अनुसार, इस गिरावट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक तनाव भारत के बाजार और निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर रहा है.
युद्ध और अर्थव्यवस्था पर असर
संपादकीय में लिखा गया, "केंद्र की मोदी सरकार चाहे कितना भी दिखावा कर ले, लेकिन अमेरिका-ईरान युद्ध का सीधा परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था पर हुआ है और वह रोज उजागर हो रहा है.." खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक आवाजाही प्रभावित होने से भारत के तेल और गैस आयात पर असर पड़ा है.
लेख के अनुसार, इसका सीधा असर उद्योग क्षेत्र पर पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बनने की आशंका जताई गई है. लगातार बढ़ते हमले और तनाव के कारण स्थिति जल्द सुधरने के संकेत नहीं मिल रहे हैं. पश्चिम एशिया के अन्य देश भी ईरान के हमलों के कारण युद्धग्रस्त हो गए हैं. इसलिए वहां से भारत आने वाले कच्चे तेल और गैस के आयात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है.
रुपये की कमजोरी और निवेशकों की चिंता
लेख में तंज कसा गया कि मोदी सरकार उठते-बैठते पांच ट्रिलियन इकोनॉमी का सपना दिखाती रहती है, मगर एक झटके में शेयर बाजार के लाखों करोड़ रुपए उड़ जाते हैं, इसका अर्थ ही यह है कि भारत के आर्थिक-औद्योगिक निवेशकों की मानसिकता पर युद्ध और अन्य घटनाक्रम का बड़ा प्रभाव पड़ा है.
लेख में रुपया गिरने पर कहा गया कि डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है और यह 93.89 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है. अनुमान है कि निकट भविष्य में रुपया 95 प्रति डॉलर तक जा सकता है. पिछले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं, जिससे बाजार पर और दबाव बढ़ा है. ‘सामना’ में यह भी कहा गया कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो भारत की जीडीपी पर भी असर पड़ सकता है और आर्थिक विकास दर में गिरावट आ सकती है.
सामना के अनुसार, "मोदी सरकार वैसे भी पांच ट्रिलियन इकोनॉमी और दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का शिगूफा छोड़ती रहती है. मगर ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न आर्थिक चुनौतियां यह सरकार कैसे झेलेगी? विदेशी निवेश में लगी भयानक गिरावट और रुपए की तेज फिसलन को वैâसे रोकेगी? शेयर बाजार में 23 मार्च को हुए 11 लाख करोड़ के भूकंप से क्या मोदी सरकार हिलेगी? सरकार के बंद कान और आंखें क्या खुलेंगी?"
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Source: IOCL




























