'हम SIR के विरोधी नहीं हैं, बल्कि...', सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उद्धव ठाकरे गुट ने साफ किया रुख
Maharashtra News: शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में है और वह भारतीय नागरिक है, फिर भी उसे वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, ये नहीं होना चाहिए.

एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उद्धव गुट ने प्रतिक्रिया दी है. शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि हम एसआईआर के विरोधी नहीं हैं, बल्कि इसके नाम पर हो रही साजिश के विरोधी हैं. हम सिर्फ ये चाहते हैं कि चुनाव पारदर्शी तरीके से हो और मतदाताओं को न्याय मिले.
'भारत के नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित न हों'
उद्धव गुट के नेता आनंद दुबे ने मीडिया से बातचीत में कहा, "हमारे देश में हर 5 साल में चुनाव होते हैं और हर 5 साल में लाखों वोटर्स भी बढ़ जाते हैं. वोटर्स को न्याय भी मिले और चुनाव पारदर्शी हो. बस इतनी सी ही बात है. अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में है और वह भारतीय नागरिक है, फिर भी उसे वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, ये नहीं होना चाहिए.''
Mumbai, Maharashtra: On SIR, Shiv Sena (UBT) Spokesperson Anand Dubey says, "See, elections are held in our country every 5 years. And every 5 years, lakhs of voters increase. Voters should receive justice, and elections should be transparent. That's it. If a person’s name is on… pic.twitter.com/R1qhJJonff
— IANS (@ians_india) May 28, 2026
'घुसपैठिए वोट देकर भाग जा रहे, ये भी नहीं होना चाहिए'
उन्होंने आगे कहा, ''कोई भारत का मतदाता नहीं है और चोरी छिपे घुसपैठिए बनकर वोट देकर भाग जा रहा है, ये भी नहीं होना चाहिए. इतनी सिंपल सी बात सरकार को भी समझ में नहीं आ रही है और ना ही चुनाव आयोग को समझ में आ रही है. हम एसआईआर के विरोधी नहीं हैं. एसआईआर के नाम पर षड्यंत्र के विरोधी हैं."
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SIR पर सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (27 मई) को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए निर्वाचन आयोग की ओर से अपनाई गई दस्तावेजीकरण की व्यवस्था को बरकरार रखा था. अदालत ने कहा कि यह न तो मनमाना था और न ही वैधानिक योजना से बाहर था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एसआईआर की कवायद संबंधी आयोग के अधिकार को बरकरार रखा और कहा कि 'आधार' नागरिकता का प्रमाण नहीं है.
चीफ जस्टिस ने 124 पेज के फैसले में, जनगणना प्रक्रिया के हिस्से के रूप में आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेजीकरण प्रक्रिया की वैधता पर अलग से विचार किया. फैसले में कहा गया कि चुनाव आयोग को निवास और पात्रता जैसी वैधानिक शर्तों को स्थापित करने में दस्तावेजों के महत्व के आधार पर उन्हें वर्गीकृत करने का अधिकार है.
ममता बनर्जी के खिलाफ मामले पर क्या बोले आनंद दुबे?
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चल रहे मामले पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, "वहां अब बीजेपी की नई नवेली सरकार आ गई है. अगर वे ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मामले दर्ज करते हैं और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश करते हैं, तो ये सब होगा, और इसके जवाब में वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगी. बीजेपी अपनी लड़ाई लड़ेगी और विपक्ष अपनी लड़ाई लड़ेगा.''
विपक्ष को पूरी तरह से तैयार रहना है- आनंद दुबे
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष को पूरी तरह से तैयार रहना है कि कभी भी ईडी और सीबीआई की रेड हो सकती है. ऐसे में अगर पूर्व मुख्यमंत्री पर शिकंजा कस रहा है तो ये अविश्वसनीय नहीं है, ये तो विश्वास करने वाली बात है. ये तो हमलोगों को पता है, स्वाभाविक प्रक्रिया है. डरना और घबराना नहीं है, सामना करने के लिए तैयार रहना है.
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