'न रडार, न पर्याप्त स्टाफ', अजित पवार की मौत पर संजय राउत ने उठाए सवाल, फिर की गहन जांच की मांग
Sanjay Raut News: अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत को संजय राउत ने तकनीकी लापरवाही बताया और जांच की मांग की. रिपब्लिक डे परेड में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को पीछे बिठाने पर सवाल उठाए.

शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय संजय राउत ने एक बार फिर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत को लेकर तकनीकी लापरवाही की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा है कि इसी वजह से हमने उन्हें खो दिया. साथ ही रिपब्लिक डे परेड में विपक्ष के नेताओं को पीछे बिठाए जाने को लोकतंत्र और प्रोटोकॉल का अपमान बताया.
अजित पवार की मौत पर तकनीकी जांच की मांग
संजय राउत ने कहा कि अजित पवार की मौत को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसकी गंभीर तकनीकी जांच होनी चाहिए. उनका आरोप है कि जिस एयरपोर्ट पर हादसा हुआ, वहां जरूरी सुविधाओं का भारी अभाव था.
संजय राउत ने सवाल उठाया कि वहां न तो एटीसी है, न रडार और न ही पर्याप्त स्टाफ, इसके बावजूद बड़े-बड़े वीआईपी विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ कराई जाती रही.
उन्होंने कहा कि अजित पवार, शरद पवार और उद्योगपति गौतम अडानी जैसे लोग भी इसी एयरपोर्ट का इस्तेमाल करते रहे हैं. सवाल यह है कि डीजीसीए क्या कर रहा था और इतनी बड़ी चूक पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
बारामती एयरपोर्ट की बदहाली पर सवाल
राउत ने बारामती एयरपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बुनियादी तकनीकी सुविधाएं ही नहीं हैं. देश और महाराष्ट्र में कई हवाई पट्टियां बना दी गई हैं, लेकिन उनके संचालन के लिए न तो सिस्टम है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम. ऐसे में हादसों की आशंका बनी रहती है और अजित पवार की मौत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.
रिपब्लिक डे परेड में विपक्ष के अपमान का आरोप
रिपब्लिक डे परेड को लेकर संजय राउत ने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ नेताओं को पांचवीं कतार में बिठाया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उनके मुताबिक, प्रोटोकॉल के अनुसार दोनों नेता प्रतिपक्ष को सम्मान के साथ आगे बैठाया जाना चाहिए था.
राउत ने कहा कि पहली-दूसरी कतार में ऐसे लोग बैठे थे जिनका प्रोटोकॉल से कोई लेना-देना नहीं था, जबकि विपक्ष के नेता पीछे थे. यह लोकतंत्र के लिए विदारक दृश्य था.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें विपक्ष को कमजोर करने के लिए हर स्तर पर नियम-कानून बदलने की कोशिश कर रही हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए अच्छा संकेत नहीं है.
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