TMC के बागी सांसदों के NCPI में विलय की घोषणा पर संजय राउत बोले, 'अब उनकी...'
Sanjay Raut News: उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने ममता बनर्जी की पार्टी TMC में बगावत को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि एनसीपीआई में विलय ही टीएमसी के बागी सांसदों के पास एकमात्र विकल्प था.

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में बगावत के संकट के बाद देशभर में इस सियासी मसले को लेकर चर्चा हो रही है. बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय की घोषणा के बीच उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है. शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने सोमवार (15 जून) को कहा कि 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में अपना विलय करने वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों का अब उनकी मूल पार्टी पर कोई दावा नहीं रह गया है.
बागी गुट से ताल्लुक रखने वाले सुदीप बंद्योपाध्याय ने रविवार (14 जून) को कहा था कि वे मूल तृणमूल के रूप में मान्यता प्राप्त करने और पार्टी के चुनाव चिह्न को हासिल करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.
'NCPI में विलय ही बागी सांसदों के पास एकमात्र विकल्प था'
वर्ष 2022 में पार्टी में विभाजन के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के हाथों अपनी मूल पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न गंवा चुके उद्धव गुट के नेता राउत ने कहा, "दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए एनसीपीआई में विलय ही बागी सांसदों के पास एकमात्र विकल्प था. इसलिए अब तृणमूल और उसके चुनाव चिह्न पर उनका दावा पूरी तरह खत्म हो चुका है.''
एनसीपीआई जैसी पार्टियां बना रही है बीजेपी- संजय राउत
राउत ने आगे कहा, ''बागी सांसदों ने एनसीपीआई के साथ विलय का फैसला तब किया, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में त्रिपुरा स्थित इस अल्पचर्चित संगठन के उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई थी.'' उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी, एनसीपीआई जैसी पार्टियां बना रही है और विपक्ष के सांसदों को उसमें इस तरह धकेल रही है 'जैसे वे गुलाम हों.'' ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की यह जंग संसद और पश्चिम बंगाल विधानसभा दोनों जगह एक साथ लड़ी जा रही है.
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