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Water Crisis: महाराष्ट्र में पानी के लिए त्राहिमाम, कई जिलों में बूंद-बूंद को तरसे लोग, टैंकर बना सहारा

Maharashtra Water Crisis: महाराष्ट्र में जल संकट गहरा गया है. मराठवाड़ा, नाशिक, पुणे और लातूर समेत कई जिलों में लोग पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं. कई शहरों में 12 से 13 दिन बाद पानी मिल रहा.

देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है, लेकिन महाराष्ट्र में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं. अप्रैल और मई 2026 की तेज गर्मी ने राज्य के कई जिलों में जल संकट को गंभीर बना दिया है. बांधों का जलस्तर तेजी से घट रहा है और गांवों में पीने के पानी तक की किल्लत होने लगी है. कई इलाकों में लोग सरकारी टैंकरों के भरोसे जिंदगी गुजार रहे हैं.

राज्य के ज्यादातर बड़े बांधों में पानी का स्तर 50 प्रतिशत से नीचे पहुंच चुका है. प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन बढ़ती गर्मी और घटती जल उपलब्धता ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

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मराठवाड़ा में सबसे ज्यादा संकट

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी की सबसे खराब स्थिति देखने को मिल रही है. छत्रपति संभाजीनगर, जालना और धाराशिव जिलों के सैकड़ों गांवों में पीने का पानी बड़ी समस्या बन चुका है. कई गांवों में लोग रोजाना टैंकर का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं.

मराठवाड़ा पहले से ही सूखा प्रभावित इलाका माना जाता है. इस साल कमजोर मानसून और लंबे समय तक पड़ी भीषण गर्मी ने हालात और खराब कर दिए हैं. यहां कम बारिश और शुष्क मौसम की वजह से जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं. कुएं और बोरवेल जवाब देने लगे हैं, जिससे ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है.

उत्तर और पश्चिम महाराष्ट्र भी प्रभावित

उत्तर महाराष्ट्र के नाशिक और जलगांव जिलों में भी पानी की भारी कमी देखने को मिल रही है. कई गांवों में लोगों को रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. वहीं पश्चिम महाराष्ट्र के अहमदनगर, पुणे, सातारा, सांगली और सोलापुर जिलों में भी सूखे जैसे हालात बन गए हैं.

इसके अलावा यवतमाल जिले की आर्णी तहसील और पालघर के कुछ हिस्सों में भी जल संकट गहराने की खबरें सामने आ रही हैं. लगातार घटते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.

बांधों में तेजी से घट रहा जलस्तर

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 25 अप्रैल 2026 तक पुणे संभाग के बांधों में केवल करीब 30 प्रतिशत पानी बचा था. वहीं नागपुर संभाग में जलस्तर लगभग 37.55 प्रतिशत और मराठवाड़ा क्षेत्र में करीब 35.82 प्रतिशत दर्ज किया गया.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो हालात और खराब हो सकते हैं. कई इलाकों में भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता और कम हो रही है.

गांवों में पानी के लिए लंबी कतारें

जल संकट का असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है. ग्रामीण इलाकों में महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं. शाहपुर और बोरीचीवाड़ी जैसे गांवों में सुबह से ही पानी के टैंकरों के पास लंबी कतारें लग जाती हैं.

कई जगहों पर एक टैंकर पहुंचते ही लोगों में पानी भरने की होड़ मच जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि दिन का बड़ा हिस्सा सिर्फ पानी जुटाने में निकल जाता है. इससे बच्चों की पढ़ाई और लोगों के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है.

कई शहरों में कई दिनों बाद मिल रहा पानी

भीषण गर्मी के बीच पानी की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन सप्लाई लगातार कम हो रही है. लातूर जिले के औसा शहर में लोगों को 12 दिन में एक बार पानी मिल रहा है. वहीं नाशिक के मनमाड शहर में 13 दिन के अंतराल पर जलापूर्ति की जा रही है.

ऐसे हालात में लोगों को पीने, खाना बनाने और नहाने तक के लिए पानी बचाकर इस्तेमाल करना पड़ रहा है. पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती बन गया है.

जल संकट का असर खेती पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कई गांवों में सिंचाई के साधन ठप पड़ चुके हैं. किसान खरीफ सीजन को लेकर चिंतित हैं क्योंकि खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है.

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पशुओं के लिए चारा और पानी की कमी ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहा तो महाराष्ट्र के कई हिस्सों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.

फिलहाल प्रशासन टैंकरों और जल प्रबंधन के जरिए राहत पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन राज्य के लाखों लोगों के सामने पानी का संकट अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.

मृत्युंजय सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिनका पत्रकारिता में 18 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में ABP News में कार्यरत हैं और महाराष्ट्र में डिप्टी ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं. वे अपराध, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी रिपोर्टिंग करते हैं. उनकी डिफेंस में काफी रुचि है.
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