Maharashtra: बेटियों के जन्म पर सिद्धिविनायक गणपति मंदिर करेगा 10 हजार की FD, क्या है शर्त?
Maharashtra News: सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट ने ‘भाग्यलक्ष्मी योजना’ के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्मी बच्चियों के लिए 10,000 रुपये की एफडी देने का निर्णय लिया है। यह योजना 8 मार्च से लागू होगी.

Siddhivinayak Bhagyalakshmi Yojana: महाराष्ट्र सरकार की मुख्यमंत्री लाडली बहिन योजना ने विधानसभा चुनावों में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है. यह योजना हर घर तक अपनी पहचान बना चुकी है. लड़कियों के जन्म को बढ़ावा देने के लिए सरकार पहले से ही माझी कन्या भाग्यश्री योजना चला रही है, जिसके तहत पहली बेटी के जन्म पर माता-पिता को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. इसके अलावा, लाडली योजना भी लागू है, जिसमें लड़की के 18 वर्ष की उम्र तक 75,000 रुपये की वित्तीय सहायता सरकार द्वारा दी जाती है.
इसी दिशा में अब एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए, श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट ने भी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक नई योजना शुरू करने का निर्णय लिया है. ‘श्री सिद्धिविनायक भाग्यलक्ष्मी योजना’ के तहत, महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाली बच्चियों के नाम पर उनकी मां के बैंक खाते में 10,000 रुपये की FD जमा की जाएगी.
इन बच्चियों के लिए योजना
ट्रस्ट की प्रबंधन समिति ने इस योजना को मंजूरी दे दी है और इसे सरकार की स्वीकृति के लिए भेजा गया है. योजना की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद इसके नियम और शर्तों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी. यह योजना 8 मार्च, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जन्म लेने वाली बच्चियों के लिए लागू होगी, जिससे वे आर्थिक रूप से लाभान्वित होंगी.
श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट की 31 मार्च को एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष सदानंद सरवणकर ने की. इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए ट्रस्ट की अनुमानित आय 114 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन यह बढ़कर 133 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. अगले वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 154 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है.
जानें सिद्धिविनायक गणपति मंदिर के बारे में
श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर, गणपति बप्पा का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर आते हैं. अब यह ट्रस्ट सामाजिक सेवा में भी एक अहम भूमिका निभाने जा रहा है, जिससे महाराष्ट्र में बेटियों के जन्म को बढ़ावा मिलेगा और उनका भविष्य सुरक्षित होगा.
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