महाराष्ट्र में झोपड़ियों पर सरकार का बड़ा फैसला, 3 महीने में सर्वे; पात्र लोगों को मिलेगा घर
Mumbai Slum News In Hindi: मुंबई के स्लम में रहने वालों के लिए वाली खबर सामने आई है. 2011 से पहले की सभी झोपड़ियों को संरक्षण मिलेगा. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि सरकार पुनर्वास करेगी.

महाराष्ट्र सरकार ने राज्यभर में 1 जनवरी 2011 से पहले बनी सभी पात्र झोपड़ियों (स्लम) को संरक्षण देने का बड़ा फैसला किया है. सरकार इन झोपड़ियों में रहने वाले पात्र निवासियों का पुनर्वास स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (SRA), म्हाडा (MHADA) अथवा अन्य आवास योजनाओं के माध्यम से करेगी. यह घोषणा गुरुवार (9 जुलाई) को विधानसभा में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने की.
चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि मुंबई उपनगरों सहित पूरे महाराष्ट्र में 1 जनवरी 2011 से पहले सरकारी, वन विभाग तथा केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न प्राधिकरणों की जमीनों पर बसे पात्र निवासियों का विस्तृत सर्वेक्षण अगले तीन महीनों में पूरा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस नीति को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और अब पूरे राज्य में इसे युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है.
Maharashtra News: मॉल में चलने वाले गेमिंग जोन रडार पर, फायर ऑडिट के साथ होगी सरप्राइज चेकिंग
राजस्व मंत्री ने क्या बताया?
राजस्व मंत्री ने बताया कि मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और कोंकण क्षेत्र में मैंग्रोव, वन, राजस्व, नज़ूल तथा सिडको की जमीनों पर बड़ी संख्या में झोपड़ियां विकसित हो चुकी हैं. विकास नियंत्रण नियमों (डीसीआर), पर्यावरणीय प्रतिबंधों तथा वन विभाग के नियमों के कारण कई स्थानों पर इन बस्तियों को उसी जगह नियमित करना संभव नहीं है.
इस समस्या के समाधान के लिए कोंकण संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है. इस समिति में मुंबई शहर और मुंबई उपनगर के जिला कलेक्टर भी शामिल हैं. समिति ने सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया है.
3 महीनों में पूरा होगा बायोमेट्रिक और फिजिकल सर्वे
बावनकुले ने बताया कि विधानसभा में जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए संबंधित सभी जमीनों पर रहने वाले लोगों का बायोमेट्रिक और फिजिकल सर्वे अगले तीन महीनों में पूरा किया जाएगा. इसके आधार पर एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा.
उसमें यह तय होगा कि पर्यावरणीय या तकनीकी कारणों से जिन बस्तियों का उसी स्थान पर नियमितीकरण संभव नहीं है, वहां रहने वाले पात्र लोगों का पुनर्वास म्हाडा, सिडको या एसआरए की आवासीय परियोजनाओं में किस प्रकार किया जाएगा.
उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 जनवरी 2011 से पहले के किसी भी पात्र निवासी को बेघर नहीं होने दिया जाएगा. राज्य सरकार उनके आवासीय अधिकारों की रक्षा और सम्मानजनक पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
NDA में शामिल हुए बिना भी BJP को फायदा पहुंचाएंगे शरद पवार? जानें अंदर की बात
























