महाराष्ट्र: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर मंत्री छगन भुजबल का बड़ा बयान, कहा- 'अगर ये...'
Dharmendra Pradhan Resignation: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि आंदोलन के कुछ दिनों बाद ही सीनियर नेताओं को जंतर-मंतर पर जाकर प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करनी चाहिए थी.

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने छात्रों के आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक तरह से केंद्र की एनडीए सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने जो कल (25 जुलाई) इस्तीफा दिया है, उन्हें यह 15-20 दिन पहले ही दे देना चाहिए था. अगर ऐसा होता तो इस तरह के हालात नहीं बनते. इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का जिक्र करते हुए केंद्र को घेरा.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर पूछे गए सवाल पर महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने कहा, "जो हुआ, सो हुआ. सारी चीजें आपके सामने है. लेकिन अगर यह पहले हुआ होता, तो शायद उसके बाद जो लाठीचार्ज हुआ, वहां अशांति फैली, देश भर में जो कुछ भी हुआ, उसे टाला जा सकता था.''
VIDEO | Nashik (Maharashtra): On Union Education Minister Dharmendra Pradhan's resignation, Maharashtra Minister Chhagan Bhujbal says, "What has happened, has happened. But if this had happened earlier, perhaps the subsequent lathi-charge, the unrest there, and everything that… pic.twitter.com/KufsZqn4fA
— Press Trust of India (@PTI_News) July 26, 2026
'युवाओं की नाराजगी दूर करने के लिए संवाद जरूरी है'
उन्होंने आगे कहा, ''धर्मेंद्र प्रधान ने कल (25 जुलाई) को इस्तीफा दिया, लेकिन अगर उन्होंने ऐसा 15-20 दिन पहले किया होता, तो बेहतर होता. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ दिनों बाद ही सीनियर नेताओं को जंतर-मंतर पर जाकर बातचीत करनी चाहिए थी. सोनम वांगचुक को भी 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहना पड़ा. इन सभी घटनाओं से लोगों में गुस्सा और नाराजगी पैदा हुई है. अब इसे शांत किया जाना चाहिए और सभी के साथ बातचीत और संवाद बनाए रखना चाहिए."
25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ आंदोलन
गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था. इसके बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों में जश्न का माहौल दिखा और आंदोलन को समाप्त कर दिया गया. इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कई हफ्ते तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और जन आंदोलन चला. प्रदर्शनकारी नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर जवाबदेही तय करने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.
अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस ने जबरदस्ती उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था. जिसके बाद छात्रों और प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त नाराजगी देखी गई थी. इसके बाद मेदांता अस्पताल में दो केंद्रीय मंत्री सोनम वांगचुक से मिलने गए थे. सरकार से आश्वासन मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के बाद अपना अनशन तोड़ा था.
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