मुंबई में प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, BMC को लगाई फटकार, निर्माण कार्यों पर रोक
Mumbai Pollution: मुंबई में बढ़ते प्रदूषण पर हाई कोर्ट ने BMC को फटकार लगाई. 1000 करोड़ से ऊपर के नए प्रोजेक्ट्स पर रोक लगी. भ्रष्टाचार रोकने के लिए लॉटरी सिस्टम और बटन कैमरे का सुझाव दिया गया.

मुंबई में अनियंत्रित निर्माण कार्यों और उससे फैलते वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के कमिश्नर भूषण गगरानी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शहर में प्रदूषण फैलाने वालों के मन में कानून का खौफ होना चाहिए. कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि विकास की अंधी दौड़ में लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता.
सुनवाई के दौरान जब यह तथ्य सामने आया कि मुंबई में 1000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले लगभग 125 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, तो कोर्ट ने हैरानी जताई. अदालत ने टिप्पणी की, "मुंबई कोई इतना बड़ा शहर नहीं है कि यहाँ 1000 करोड़ से ऊपर के 125 प्रोजेक्ट्स एक साथ चलें. यह आपकी नियंत्रण सीमा से बाहर जा चुका है." कोर्ट ने कमिश्नर को निर्देश दिया कि अगले दो हफ्तों तक 1000 करोड़ से ऊपर के किसी भी नए प्रोजेक्ट को मंजूरी न दी जाए.
भ्रष्टाचार रोकने के लिए 'पुलिस' जैसा फॉर्मूला
निरीक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने 'पुलिस' की तर्ज पर दिलचस्प सुझाव दिए:
लॉटरी सिस्टम: कौन सा दस्ता (Squad) किस साइट पर जाएगा, यह लॉटरी से तय हो ताकि साठगांठ की गुंजाइश न रहे.
तकनीकी निगरानी: फील्ड दस्तों की गाड़ियों में GPS और कर्मियों के पास बटन कैमरा अनिवार्य हो.
मोबाइल बैन: चेकिंग के दौरान अधिकारियों के पास फोन न हो, ताकि वे बिल्डरों के संपर्क में न रह सकें.
BMC की अब तक की कार्रवाई और जुर्माना
BMC कमिश्नर ने कोर्ट को बताया कि पिछले एक साल में प्रदूषण नियमों के उल्लंघन पर 3,497 'स्टॉप वर्क' नोटिस जारी किए गए हैं. वायु प्रदूषण और खुले में कचरा जलाने के लिए अब तक कुल 7,48,600 रुपये का जुर्माना वसूला गया है. सर्वाधिक जुर्माना 'M/W' वार्ड (1.30 लाख रुपये) में लगाया गया है.
आगामी 15 दिनों की कार्ययोजना
प्रदूषण कम करने के लिए BMC ने 28-सूत्रीय दिशा-निर्देशों के साथ अपनी नई योजना पेश की है:
सघन निगरानी: 94 वार्ड स्तरीय दस्ते प्रतिदिन कम से कम दो साइटों का दौरा करेंगे. सहायक आयुक्त (AC) हॉटस्पॉट क्षेत्रों का रोजाना दौरा करेंगे.
धूल पर नियंत्रण: 9 इलेक्ट्रिक रोड स्वीपर अब 8 के बजाय 12 घंटे सड़कों की सफाई करेंगे.
बिल्डरों की जिम्मेदारी: निर्माण स्थलों के प्रमोटरों के लिए सड़क की सफाई अनिवार्य होगी. 10,000 वर्ग मीटर से बड़ी साइट के प्रमोटर को 500 मीटर तक की सड़क साफ करनी होगी.
जियोफेंसिंग: सभी निर्माण स्थलों पर सेंसर-आधारित एयर क्वालिटी मॉनिटर लगाए जाएंगे और दस्तों की निगरानी VTMS (वाहन ट्रैकिंग सिस्टम) के जरिए होगी.
कोर्ट ने कहा कि उल्लंघन करने वालों को नोटिस देने के साथ-साथ इसका व्यापक प्रचार भी किया जाए ताकि जनता को पता चले. मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी, जहाँ विशेष कमेटी के सामने विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी.
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Source: IOCL





















