ऑटो-मराठी भाषा विवाद ने किया बैकफायर! BJP-शिंदे गुट ने अब उठाए ये कदम
मुंबई में ऑटो टैक्सी और कमर्शियल वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने का नोटिस दिया जा रहा है, जिसके चलते ऑटो चालकों के एक वर्ग ने मुंबई की सड़कों पर सेवा देना बंद कर दिया है.

मुंबई में ऑटो टैक्सी और कमर्शियल वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा ज्ञान जरूरी है, जिसकी परीक्षा सड़कों पर RTO अधिकारी ले रहे है. जिन्हें मराठी नहीं आती उन्हें एक महीने में मराठी सीखने का नोटिस दिया जा रहा है. लेकिन ऑटो चालकों के एक वर्ग ने मुंबई की सड़कों पर सेवा देना बंद कर दिया, जिससे यातायात की व्यवस्था चरमरा गई. प्रांतीय ऑटो चालकों में नाराजगी अब सत्ताधारी BJP और शिवसेना को भारी पड़ रही है.
शिवसेना और BJP दोनों डैमेज कंट्रोल में जुट गई हैं. शिंदे की शिवसेना ने बुधवार (26 अगस्त) देर रात ऑटो चालकों को मराठी ज्ञान का सर्टिफिकेट बांटा तो इस कार्यक्रम से पहले बीजेपी ने भी आनन-फानन में मराठी भाषा सर्टिफिकेट बांटा.
एकनाथ शिंदे का आश्वासन, टैक्सी चालकों से नहीं छीनेंगे रोजी रोटी
मुंबई के बोरीवली स्थित कोरा केंद्र में शिवसेना विधायक प्रकाश सुर्वे के माध्यम से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा प्रशिक्षण अभियान के तहत प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चालक शामिल हुए और मराठी भाषा सीखने के बाद उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किए गए. महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि इस अभियान के तहत करीब 1 लाख 60 हजार से अधिक ऑटो और टैक्सी चालकों ने मराठी भाषा सीखने के लिए पंजीकरण कराया है. इनमें से बड़ी संख्या में चालकों ने प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाणपत्र प्राप्त किया है.
सरकार का कहना है कि मुंबई में वर्षों से काम कर रहे ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी छीनना या किसी पर भाषा थोपना नहीं, बल्कि यात्रियों और चालकों के बीच संवाद को और बेहतर बनाना है.
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5 हजार ऑटो चालकों ने सीखी मराठी भाषा
शिवसेना विधायक और कार्यक्रम के आयोजक प्रकाश सुर्वे ने कार्यक्रम में कहा कि मराठी भाषा सीखना मुंबई की संस्कृति और यहां के लोगों से जुड़ने का एक माध्यम है. सरकार और परिवहन विभाग की ओर से इस अभियान में शामिल चालकों को पूरा सहयोग दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि मुंबई सभी के लिए है और यहां अलग-अलग राज्यों से आने वाले लोग वर्षों से रोजगार कर रहे हैं. सरकार का प्रयास है कि सभी लोग मिल-जुलकर रहें और मराठी भाषा के माध्यम से मुंबई से अपना जुड़ाव और मजबूत करें.
भाषा को विवाद का विषय न बनाएं
कार्यक्रम में युवाओं और नागरिकों से भी अपील की गई कि वे भाषा को विवाद का विषय बनाने के बजाय संवाद और आपसी सम्मान का माध्यम बनाएं. सरकार का कहना है कि मुंबई के विकास में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना ही इसका उद्देश्य है.
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि, 15 हजार ऑटो चालकों ने मराठी भाषा सीखी और उन्हें सर्टिफिकेट वितरित किया गया है . महाराष्ट्र में एक लाख 60 हजार लोगो ने रजिस्ट्रेशन कर मराठी भाषा सीखी. मराठी भाषा और मुंबई से प्रेम ऑटो चालकों ने दिखाया है. मुंबई में रहने वाले लोगों ने मराठी भाषा सीखकर संवाद का काम किया है इसलिए हमारे अधिकारी भी उन्हें पूरा सहयोग करेंगे. किसी की भी रोजी रोटी पर असर नहीं पड़ेगा . किसी का लाइसेंस और परमिट अब तक रद्द नहीं किया गया है.
राज ठाकरे पहले अपने पोते का एडमिशन कराएं मराठी स्कूल में
मलाड स्थित मुंबई पब्लिक स्कूल में बीजेपी की ओर से रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया. मराठी भाषा का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले चालकों को इस अवसर पर प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रिक्शा और टैक्सी चालक, नागरिक तथा कार्यकर्ता उपस्थित रहे. इस दौरान संदेश दिया गया कि मराठी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
बीजेपी में अपना गुस्सा प्रांतवाद और भाषावाद की राजनीति करने वाले राज ठाकरे पर निकला. मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने कहा की , राज ठाकरे अपनी खत्म हो रही राजनीति को फिर से एक बार जिंदा करने के लिए समाज में जो है वो विभाजन करने की कोशिश हमेशा करते आए हैं. हमेशा मराठियों के मुद्दे के ऊपर मारपीट करना, मराठी आदमी का नाम बदनाम करना, इस प्रकार की चीजें वो और उनकी पार्टी हमेशा करती आई है. मेरा चैलेंज है राज ठाकरे को कि उनके पोते का एडमिशन बालमोहन विद्यामंदिर के मराठी स्कूल में लेकर बताएं और फिर मराठियों के मुद्दे के ऊपर बात करें.
गौरतलाब है को पिछले कुछ चुनावों में मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीय मतदाताओं ने बीजेपी और शिवसेना गठबंधन को जमकर समर्थन दिया . लेकिन मराठी भाषा के नाम पर सख्ती और रोजी रोटी छिनने का डर ऑटो चालकों में बैठ गया. ऑटो चालक की नाराजगी का खामियाजा BJP को यूपी चुनाव में भी हो सकता है इसलिए अब दोनों पार्टिया डैमेज कंट्रोल में जुटी है.






















