MP: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सवालों के घेरे में, कांग्रेस ने पूछा- हजारों करोड़ प्रीमियम गया कहां?
MP News: मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर सवाल उठ रहे हैं. किसानों से भारी प्रीमियम वसूला गया, लेकिन क्षतिपूर्ति बहुत कम या शून्य मिली. विपक्ष इसे किसानों के साथ धोखा बता रहा है.

मध्य प्रदेश से ही 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत हुई थी, तब इसे किसानों के लिए ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बताया गया था. दावा था कि सरकार अब किसानों को नुकसान नहीं होने देगी और किसानों को उनकी फसलों की बर्बादी का सही मुआवजा मिलेगा. लेकिन आज 9 साल बाद इस योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.
- सवाल ये कि ये योजना आखिर किसके लिए है, किसानों के लिए या कॉरपोरेट के लिए ?
- सवाल ये कि इस योजना से किसको फायदा हो रहा है ?
- क्या ये योजना किसानों के साथ न्याय कर पा रही है ?
सवाल उठा रहे हैं ये आंकड़े, जो चौंकाने वाले हैं
- वर्ष 2024 - किसानों से 2743 करोड़ रुपये प्रीमियम वसूला गया.
- 100% क्षतिपूर्ति राशि 36,803 करोड़ रुपये बनती थी, लेकिन किसानों को एक भी रुपया नहीं मिला.
- वर्ष 2023 - किसानों से 2751 करोड़ रुपये वसूले गए.
- 100% क्षतिपूर्ति 36,674 करोड़ रुपये बनती थी, लेकिन किसानों को मात्र 775 करोड़ रुपये दिए गए.
- वर्ष 2022 - 3827 करोड़ रुपये प्रीमियम वसूला गया.
- 100% क्षतिपूर्ति 36,322 करोड़ रुपये बनती थी, लेकिन किसानों को केवल ₹1042 करोड़ दिए गए.
- वर्ष 2021 6700 करोड़ रुपये प्रीमियम लिया गया, लेकिन किसानों को केवल 2801 करोड़ रुपये लौटाए गए.
2016 से अब तक बीमा कंपनियों द्वारा प्रदेश के किसानों से राज्य और केंद्र सरकार के हिस्से के साथ लगभग 41 हजार करोड़ का प्रीमियम वसूला गया है. जिसमें पूर्ण क्षतिपूर्ति की राशि (Sum Assured) लगभग 3 लाख करोड़ से भी ज्यादा की थी, लेकिन किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए कुल 30 हजार करोड़ रुपये ही मीले , यानी जितना टोटल प्रीमियम दिया गया उससे भी 10 हजार करोड़ रुपये कम .
पूरी प्रक्रिया में क्या-क्या खामियां
- सर्वे गाइडलाइन के बावजूद, 25% अग्रिम राशि किसानों को कभी नहीं दी जाती.
- भुगतान में 1-2 साल तक देरी की जाती है, ताकि सरकार और कंपनियों के बीच कमीशन का खेल चल सके.
- अब तो सैटेलाइट सर्वे का बहाना लेकर पूरा नुकसान ही शून्य बता दिया जाता है.
- सैटेलाइट सर्वे में पूरे गांव को एक इकाई माना जाता है जबकि हर खेत का नुकसान अलग-अलग होता है .
किसानों में अपनी समस्याएं बताईं
जब एबीपी की न्यूज़ की टीम भोपाल के पास भैरूपुरा गांव किसानों के बीच पहुंचे तो किसानों में अपनी समस्याएं बताईं. खंडवा के किसान राजेंद्र प्रजापति को 30 हजार रुपये की प्रीमियम और लाखों रुपये के नुकसान के बावजूद सिर्फ 1200 रुपये का चेक मिला तो उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम चिट्ठी लिख दी और पैसा मुख्यमंत्री राहत कोष में भेज दिया. खुद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र में कई गांव में ऐसी स्थिति है कि लाखों रुपये के प्रीमियम जमा करने के बाद भी क्षतिपूर्ति की राशि ज़ीरो प्राप्त हुई है.
रायसेन जिले के साइन खेड़ा गांव के किसानों से कुल 21,04,209 रुपये प्रीमियम वसूला गया. इसके आधार पर 100% क्षतिपूर्ति राशि 2,71,18,919 रुपये बनती थी, लेकिन किसानों को 0 रुपये प्राप्त हुआ. यही हाल लगभग सभी गांवो का है जबलपुर में किसानों के साथ मजाक हुआ है, जिले की कुंडम तहसील के कुँवरहटा गांव को फसल बीमा के नाम पर सिर्फ 17 रुपये मिले.
चंदन पिपरिया, तहसील सिलवानी, जिला रायसेन यहां किसानों से 3,96,051 रुपये प्रीमियम वसूला गया. इसके आधार पर 100% क्षतिपूर्ति राशि 99,01,293 रुपये बननी चाहिए थी, लेकिन किसानों को कुछ नहीं मिला. घोसू ताल, तहसील सिरोंज, जिला विदिशा यहां किसानों से 12,62,232 रुपये प्रीमियम वसूला गया. इसके आधार पर 100% क्षतिपूर्ति राशि 78,58,793 रुपये बनती थी, लेकिन किसानों को कुछ नहीं मिला.
ग्राम फराड़, तहसील कालापीपल, जिला शाजापुर यहां किसानों से कुल 33,29,78 रुपये प्रीमियम वसूला गया. इसके आधार पर 100% क्षतिपूर्ति राशि 3,66,99,711 रुपये बनती थी, लेकिन किसानों को कुछ नहीं मिला. यही हाल प्रदेश के सभी जिलों का है जहां प्रदेश के किसानों को प्राप्त बीमा की राशि या तो शून्य है या फिर ऊंट के मुंह में जीरे के समान.
कांग्रेस ने की न्यायिक जांच की मांग
विपक्ष में बैठी कांग्रेस और किसान नेता इस पूरी योजना पर ही सवाल उठा रहे हैं. इसे कॉरपोरेट और सरकार की मिलीभगत बता रहे हैं. किसानों के साथ धोखा करार दे रहे हैं. कांग्रेस भी फसल बीमा योजना पर सवाल खड़ी कर रही है और पूरी प्रक्रिया की न्यायिक जांच की मांग कर रही करी है.
कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज का कहना है कि पूरी प्रक्रिया की न्यायिक जांच होनी चाहिए, इस बात की जांच होनी चाहिए कि इस योजना से बीमा कंपनियों को जो लाभ हुआ है उसके अनुपात में क्षतिपूर्ति की जो ओरिजिनल रिपोर्ट है जो पटवारी और आरआई के द्वारा बनाई गई थी वो रिपोर्ट्स आखिर है कहां ? और क्या उन रिपोर्ट्स के आधार पर किसानों को बीमा मिला ?
कांग्रेस पार्टी के सवाल
- किसानों और सरकार से वसूला गया हजारों करोड़ प्रीमियम आखिर गया कहां?
- क्यों बीमा कंपनियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई?
- क्या बीजेपी सरकार किसानों की गाढ़ी कमाई कॉरपोरेट घरानों को सौंपने का सौदा कर रही है?
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Source: IOCL























