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MP Election 2023: इस समाज के 'आशीर्वाद' के बिना यहां जीत पाना मुश्किल, जानें- कैसे हैं देपालपुर विधानसभा सीट के समीकरण

MP Elections 2023: इंदौर से सटी इस विधानसभा के चुनावी समीकरण हर चुनाव में दिलचस्प रहते हैं. इस सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है.

MP Assembly Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है. ऐसे में हम आपको विधानसभा सीटों के समीकरण के बारे में बता रहे हैं. ऐसे में आज बात करेंगे देपालपुर विधानसभा सीट की. दो निकायों और दो तहसीलों को समेटे देपालपुर विधानसभा इंदौर जिले की अहम सीट में से एक है. ऐसा देखा गया है कि इस सीट पर शुरू से ही बाहरी नेताओं ने अपना दबदबा कायम रखा है. आइए जानते हैं इस सीट के सियासी समीकरण के बारे में.

इंदौर के पास इस सीट पर कुल मतदाता 2 लाख 22 हजार हैं, जिनमें पुरुष मतदाता 1 लाख 17 हजार के करीब तो वहीं महिला मतदाता 1 लाख 8 हजार के आसपास हैं. देपालपुर विधानसभा में गेहूं और सोयाबीन की बंपर पैदावार होती है. बनेडिया जैन तीर्थ यहां की पहचान है. प्रदेश का सबसे बड़ा बनेडिया तालाब इसी इलाके में स्थित है. वर्तमान में इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. बीजेपी के मनोज पटेल यहां से विधायक रहे तो वहीं अब इस सीट पर कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है. यहां से विशाल पटेल मौजूदा विधायक हैं.

वर्तमान में कांग्रेस का कब्जा
इंदौर से सटी इस विधानसभा की सियासत की बात करें तो यहां हर चुनाव में दिलचस्प समीकरण सामने आते रहे हैं. सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है. वहीं टिकट की बात करें तो बीजेपी से पूर्व विधायक मनोज पटेल का दावा सबसे मजबूत है तो कांग्रेस मौजूदा विधायक को टिकट देने के मूड में नजर आ रही है. 

इस समाज के आशीर्वाद से मिलती है जीत
दो निकायों और दो तहसीलों को समेटे देपालपुर विधानसभा इंदौर जिले की अहम सीट में से एक है. यहां की राजनीति ने प्रदेश को कई कद्दावर नेता दिए. इस सीट पर शुरू से ही बाहरी नेताओं का दबदबा रहा. लेकिन यहां किसी भी उम्मीदवार को जीत तब ही मिलती है जब उसे कलोता समाज के लोगों का आशीर्वाद मिलता हो. पूरे देपालपुर विधानसभा क्षेत्र में कालोता समाज के 70,000 से ज्यादा वोटर्स हैं, वहीं दूसरे नंबर पर राजपूत और अन्य समाज आता है.  

अब तक ऐसे रहे आंकड़े
देपालपुर के सियासी इतिहास की बात की जाए तो 2003 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के मनोज पटेल जीते. 2008 के चुनाव में कांग्रेस की सत्यनारायण पटेल ने जीत दर्ज किया तो वहीं 2013 में फिर से बीजेपी से मनोज पटेल ने सीट पर कब्जा जमाया. 2018 में बाजी फिर कांग्रेस के विशाल पटेल ने मारी और विधायक बने. अब जब ये चुनावी साल है तो यहां एक बार फिर सियासी माहौल गरमा चला है. साथ ही टिकट पाने की होड़ भी लगी है. 

वहीं कांग्रेस की बात करें तो यहां वर्तमान विधायक विशाल पटेल का नाम सबसे पहले आता है. किसान नेता मोतीसिंह पटेल का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं.  वही बीजेपी में मनोज पटेल को पार्टी अपना चेहरा बना सकती है. दोनों पार्टियों में दावेदारों की संख्या कम नहीं है. अब देखने वाली बात ये होगी कि दोनों पार्टियां इस सीट को फतह करने के लिए किन नेताओं पर दांव लगाती है. 

ये हैं चुनावी मुद्दे
देपालपुर में मुद्दों की बात करें तो हर बार यहा की जनता से चुनाव में पहले वादे तो किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि उन वादों पर खरा उतरता नजर नहीं आता. यही वजह है कि विकास केवल सरकारी फाइलें में ही नजर आता है. जाहिर है आने वाले चुनाव में भी यहां बेरोजगारी स्वास्थ्य और दूसरे बुनियादी मुद्दें हावी रहेंगे. देपालपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने इस उम्मीद के साथ कि उनके इलाके का बेहतर विकास हो, कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टी के प्रतिनिधियों को चुनकर विधानसभा भेजा, लेकिन कोई भी नेता देवपालपुर की जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा. 

कॉलेज की कमी से बड़े शहरों का रुख कर रहे छात्र
यहां मूलभूत समस्याओं के साथ रोड कनेक्टिविटी बड़ी समस्या है. वहीं बेहतर शिक्षा व्यवस्था और कॉलेज में शिक्षकों की कमी की वजह से छात्रों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है. बेरोजगारी भी क्षेत्र में एक बड़ी परेशानी बनी हुई है. युवा रोजगार की तलाश में इंदौर और आसपास के बड़े शहरों की ओर पलायन को मजबूर हैं. सफाई को लेकर भी स्थानीय प्रशासन एक्टिव नजर नहीं आता है. स्थानीय लोगों की मानें तो नालियों की सफाई नहीं होती. 

पानी की भी है समस्या
पेयजल की किल्लत भी देपालपुर की जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया है. क्षेत्र में प्रदेश का सबसे बड़ा बनेडिया तालाब होने के बावजूद भी क्षेत्र पानी की किल्लत तो से दो चार हो रहा है. 1800 एकड़ में फैले जलाशय की गहराई 12 फिट से अब 6 फिट ही रह गई है, जिससे वाटर लेवल कम होने की समस्या भी सामने आई है. 

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उमेश भारद्वाज एबीपी न्यूज़ में बतौर इंदौर संवाददाता कार्यरत हैं. एबीपी न्यूज़ से पहले उमेश भारद्वाज कई मीडिया संस्थानों में कार्यरत रहे हैं. अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन और पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री के बाद उमेश भारद्वाज लगातार पत्रकारिता में सक्रीय हैं. युवाओं और बेरोजगारी के मुद्दे पर वो लगातार लिखते रहे हैं राजनीतिक खबरों पर उमेश भारद्वाज की पकड़ मजबूत है.
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