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एमपी: स्कूल की लापरवाही या सिस्टम की चुप्पी? कटनी हादसे में बच्चे की मौत के बाद मदद को तरसा परिवार

Madhya Pradesh News: कटनी में 18 फरवरी को जर्जर स्कूल दीवार गिरने से कक्षा 5वीं के छात्र राजकुमार बर्मन की मौत हो गई. 5 दिन बाद भी परिवार को ठोस मदद नहीं मिली है.

कटनी जिले के कैमोर में 18 फरवरी को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया. बम्हंगवा शासकीय प्राथमिक शाला की जर्जर बाउंड्रीवाल अचानक गिर गई और उसकी चपेट में आकर कक्षा 5वीं में पढ़ने वाले 11 वर्षीय राजकुमार बर्मन की मौत हो गई. घटना को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन परिवार अब भी ठोस सरकारी मदद और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के आने का इंतजार कर रहा है.

परिवार का सवाल है कि क्या एक मासूम की जान की कीमत इतनी कम है कि कोई हालचाल लेने तक नहीं आया?

कैसे हुआ हादसा?

घटना 18 फरवरी की दोपहर की है. राजकुमार रोज की तरह स्कूल गया था. बताया जा रहा है कि उसे वॉशरूम जाना था, लेकिन नए बने शौचालय पर ताला लगा था. मजबूरी में वह पुराने टॉयलेट के पास बैठ गया. तभी पास की जर्जर दीवार भरभराकर गिर गई और वह मलबे में दब गया.

स्कूल में मौजूद लोगों ने उसे निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. मासूम की मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद जांच और सहायता की बात तो कही गई, मगर अब तक परिवार को कोई ठोस आर्थिक मदद नहीं मिली है.

मां का दर्द- 'मेरा सहारा चला गया'

राजकुमार की मां शिवकुमारी बर्मन का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने बताया कि उनके पति का कुछ महीने पहले ही निधन हो चुका है. घर में कमाने वाला कोई नहीं है. वह जैसे-तैसे बेटे और बेटी के साथ जिंदगी काट रही थीं.

उनका कहना है, “मेरा बेटा ही मेरा सहारा था. अब वो भी चला गया. हम गरीबी में जी रहे हैं. मेरे बच्चे की मौत के जिम्मेदार स्कूल प्रशासन है. अगर दीवार पहले हटा दी जाती या टॉयलेट खुला होता तो मेरा बेटा आज जिंदा होता.” मां की आंखों में एक ही सवाल है, क्या उनके बेटे की मौत का कोई जिम्मेदार तय होगा?

बहन ने प्राचार्य पर लगाए आरोप

राजकुमार की बड़ी बहन खुशबू बर्मन भी उसी स्कूल में कक्षा 7वीं में पढ़ती है. उसने बताया कि हादसे की खबर उसे घर पर मिली. जैसे ही पता चला कि भाई के ऊपर दीवार गिर गई है, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई.

खुशबू का आरोप है कि स्कूल की प्राचार्य ने उससे गलत तरीके से बात की और कहा कि “तेरा भाई उस जगह क्यों गया था?” परिवार का कहना है कि हादसे के बाद संवेदनशील व्यवहार की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें दुख और अपमान ही मिला.

तेरहवीं की तैयारी, गांव ने बढ़ाया हाथ

राजकुमार की तेरहवीं का कार्यक्रम अब नजदीक है. परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है, ऐसे में गांव के लोगों ने मदद का बीड़ा उठाया है. पड़ोसी मोहम्मद खान ने बताया कि गांव में हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग मिलकर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि तेरहवीं का कार्यक्रम सम्मानपूर्वक हो सके.

जहां प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी नजर नहीं आई, वहीं गांव में सामाजिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिल रही है. लोग कह रहे हैं कि दुख की इस घड़ी में इंसानियत सबसे बड़ी है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले कैमोर क्षेत्र में बजरंग दल के एक नेता की गोली मारकर हत्या हुई थी. उस घटना के दिन ही क्षेत्रीय विधायक संजय सत्येंद्र पाठक, प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा मौके पर पहुंच गए थे.

उस मामले में आर्थिक सहायता भी दी गई थी. लेकिन एक सरकारी स्कूल की जर्जर दीवार गिरने से हुई मासूम की मौत के बाद अब तक न विधायक पहुंचे हैं, न कोई वरिष्ठ अधिकारी परिवार के घर गया है. लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या हादसों में भी संवेदनशीलता का पैमाना अलग-अलग हो गया है?

कैमोर थाना क्षेत्र के इस सरकारी स्कूल में दीवार काफी समय से जर्जर बताई जा रही थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत या हटाने का काम कर दिया जाता, तो यह हादसा टल सकता था.

कटनी जिले के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई विशेष आदेश या बड़ी सहायता की घोषणा सामने नहीं आई है. परिवार और ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या सिर्फ जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

न्याय और मदद की उम्मीद

5 दिन बीत चुके हैं. एक मां अपने बेटे को खो चुकी है, एक बहन अपने भाई के बिना स्कूल जाने को मजबूर है, और एक गरीब परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है. अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन आगे आकर जिम्मेदारी तय करेगा? क्या परिवार को आर्थिक और कानूनी सहायता मिलेगी? या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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