इंदौर: दूषित पानी से मौत के मामले में परिवाद दाखिल, 24 जनवरी तक जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश
Indore Water Contamination Case: इंदौर के दूषित पानी को लेकर कोर्ट में परिवाद दायर किया गया. जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादातन हत्या का केस दर्ज करने की मांग की गई.

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर अब एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है. इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराने के लिए न्यायालय में नया परिवाद दाखिल किया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने बाणगंगा थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि 24 जनवरी तक पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए.
दरअसल, भागीरथपुरा निवासी रामू सिंह ने अपने अधिवक्ता दिलीप नागर के माध्यम से यह परिवाद न्यायालय में प्रस्तुत किया है. याचिका में कहा गया है कि बीते पिछले करीब दो सालों से क्षेत्रवासियों को गंदा और दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके चलते कई लोग गंभीर रूप से बीमार हुए और कुछ की मौतें भी हुईं.
कोर्ट में दाखिल परिवाद में क्या है?
परिवाद में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024 में एक युवती की दूषित पानी के कारण मौत के बाद नर्मदा पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. इसके लिए नोटशीट और टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन तत्कालीन नगर निगम आयुक्त एवं वर्तमान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा टेंडर को मंजूरी नहीं दी गई थी.
उनके बाद आए नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव ने भी इस पर निर्णय नहीं लिया. याचिका के अनुसार यदि टेंडर को समय रहते स्वीकृति मिल जाती, तो कई लोगों की जानें बचाई जा सकती थीं. लगातार बीमारियों और मौतों के बाद आखिरकार 30 दिसंबर को टेंडर पास किया गया.
अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की मांग
इसी को आधार बनाते हुए तत्कालीन निगम आयुक्तों के साथ-साथ अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और जल कार्य अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की गई है.
परिवादी के वकील दिलीप नागर ने बताया कि इस संबंध में बाणगंगा थाने में आवेदन दिया गया था, लेकिन पुलिस द्वारा आवेदन स्वीकार नहीं किए जाने के कारण कोर्ट की शरण लेनी पड़ी. याचिका में यह भी मांग की गई है कि जांच पूरी होने तक सभी जिम्मेदार अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जाए. साथ ही आरोप लगाया गया है कि सरकार ने ऐसे अधिकारियों को पदोन्नति देकर पुरस्कृत किया है, जिनकी लापरवाही से लोगों की जान गई.
Source: IOCL























