इंदौर दूषित पानी ने लीं कई जिंदगियां, कौन है जिम्मेदार? जानें अब तक क्या क्या हुआ
Indore Contaminated Water: इंदौर में दूषित पानी ने स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है. भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त से सैकड़ों लोग बीमार पड़े, मौतों के आंकड़ों पर विवाद है. पाइप में गंदा पानी मिल गया था.

सबसे स्वच्छ शहर का तमगा रखने वाले इंदौर में इन दिनों हालात चिंताजनक हैं. दूषित पानी पीने से भागीरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त का ऐसा प्रकोप फैला कि बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए. बीते 8 दिनों में मौतों को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन के आंकड़े अलग-अलग हैं, जिससे गुस्सा और सवाल दोनों बढ़ते जा रहे हैं.
जानकारी के मुताबिक पाइप लाइन डालने नियमों की धज्जियां उड़ाई गई. सीवेज लाइन के नीचे पीने के पानी की लाइन डाल दी गई. नियम के मुताबिक सड़क के एक तरफ पीने के पानी की लाइन और दूसरी तरफ सीवेज की पाइप डाली जाती है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से घरों में आने वाले पानी की गंध और रंग सामान्य नहीं था. इसी पानी के इस्तेमाल के बाद लोगों को पहले उल्टी और दस्त की शिकायत हुई और फिर हालत तेजी से बिगड़ने लगी. अधिकारियों को शक है कि पेयजल पाइपलाइन में लीकेज की वजह से ड्रेनेज का गंदा पानी मिल गया, जिससे संक्रमण फैला.
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी CMHO डॉक्टर माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि भागीरथपुरा इलाके में पीने का पानी पाइपलाइन में रिसाव की वजह से गंदा हो गया था. इसी इलाके से महामारी की शुरुआत हुई है.
अधिकारियों का कहना है कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पानी की पाइपलाइन में रिसाव पाया गया था. उस जगह के ठीक ऊपर एक शौचालय बनाया गया है. उन्होंने दावा किया कि इसी रिसाव से इलाके के पानी की सप्लाई गंदी हो गई.
मौतों पर अलग-अलग दावे, असमंजस बरकरार
भागीरथपुरा के रहवासियों का दावा है कि पिछले आठ दिनों में 6 महीने के एक बच्चे समेत 13 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं प्रशासन ने अब तक डायरिया से केवल 9 मौतों की पुष्टि की है. इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है. लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर मौतें ज्यादा हैं तो सही आंकड़े सामने क्यों नहीं आ रहे.
अस्पतालों में भर्ती सैकड़ों मरीज
इलाके में बीमारी फैलने के बाद अस्पतालों में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी. जानकारी के मुताबिक करीब 1400 से 1500 लोग प्रभावित हुए, जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती कराए गए. राहत की बात यह है कि ज्यादातर मरीज अब खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं और उन्हें धीरे-धीरे छुट्टी दी जा रही है. एक मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था, लेकिन उसकी हालत भी स्थिर बताई जा रही है.
प्रशासन हरकत में, अफसर सस्पेंड
मामला तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन सक्रिय हुआ. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. अब तक दो अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है, जबकि एक को सेवा से बर्खास्त किया गया है. पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति भी बनाई गई है.
मंत्री ने किया दौरा, मुफ्त इलाज का भरोसा
भागीरथपुरा क्षेत्र जो नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 में आता है, वहां मंत्री खुद हालात देखने पहुंचे. उन्होंने कहा कि प्रशासन के मुताबिक 9 मौतों की पुष्टि हुई है, जबकि स्थानीय लोग 13 मौतों की बात कर रहे हैं.
इसकी जांच की जा रही है और यदि अतिरिक्त मौतों की पुष्टि होती है तो परिजनों को भी मुआवजा दिया जाएगा. मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि सभी पीड़ितों का इलाज मुफ्त होगा और पहले किए गए इलाज का खर्च भी सरकार वहन करेगी.
हाईकोर्ट की सख्ती, मांगी विस्तृत रिपोर्टमामला जब अदालत तक पहुंचा तो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम को फटकार लगाई. कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रभावित इलाकों में तुरंत साफ और शुद्ध पेयजल की सप्लाई सुनिश्चित की जाए.
साथ ही राज्य सरकार और निगम को अगली सुनवाई में विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है, जिसमें प्रभावित लोगों की संख्या, अस्पताल में भर्ती मरीजों और दी जा रही मेडिकल सुविधाओं का पूरा ब्योरा देना होगा.
घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर मौतों के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया और कहा कि पानी में मिलावट के जिम्मेदार लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए.
फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक जल व्यवस्था की जा रही है. लोग चाहते हैं कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में दोबारा ऐसी त्रासदी न दोहराई जाए. इंदौर के लिए यह सिर्फ एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि भरोसे की बड़ी परीक्षा भी बन चुका है.
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Source: IOCL





















