जम्मू-कश्मीर: सामने आया कोरोना काल का बड़ा मेडिकल घोटाला, EOW कश्मीर ने दर्ज किया केस
Jammu-Kashmir News: कोरोना काल की मेडिकल खरीद घोटाले में क्राइम ब्रांच J&K की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने श्रीनगर के दो आरोपियों पर केस दर्ज किया. फर्जी पहचान और करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप सामने आया है.

कश्मीर में कोरोना काल की मेडिकल खरीद से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है. क्राइम ब्रांच J&K की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) कश्मीर ने गुरुवार (26 फरवरी) को खुलासा किया कि COVID-19 महामारी के दौरान मेडिकल सप्लाई की खरीद में कथित धोखाधड़ी के मामले में श्रीनगर के दो लोगों के खिलाफ औपचारिक केस दर्ज किया गया है.
आरोप है कि इन दोनों ने खुद को सरकारी विभागों से जुड़ा अधिकारी बताकर, फर्जी पहचान के जरिए सरकारी सिस्टम को गुमराह किया और महामारी जैसे संवेदनशील समय में बड़े स्तर पर आर्थिक अनियमितताओं को अंजाम दिया. यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि आपदा के समय विश्वासघात की गंभीर तस्वीर पेश करता है.
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, एक बयान में एक प्रवक्ता ने कहा कि क्राइम ब्रांच J&K की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग कश्मीर ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में COVID-19 महामारी के दौरान मेडिकल सप्लाई की खरीद से जुड़े बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाते हुए दो लोगों के खिलाफ एक फॉर्मल केस दर्ज किया है.
उन्होंने कहा कि यह केस एक लिखित शिकायत के बाद शुरू किया गया था. जिसमें आरोप लगाया गया था कि श्रीनगर के पीरबाग और सनत नगर के रहने वाले आरोपियों ने खुद को J&K मिनिस्ट्री और OSD सप्लाई के डेलीगेट के तौर पर पेश किया था.
पहचान छुपाकर सरकारी विभाग से की धोकाधरी
उन्होंने कहा कि धोखे से, उन्होंने डिपार्टमेंट और इंस्टीट्यूशन को मेडिकल सामान के पेमेंट असली सप्लायर के नाम पर धोखे से खोले गए. बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए उकसाया. आरोपियों ने असली सप्लायर की पहचान गलत बताने के लिए कथित तौर पर नकली ईमेल ID भी बनाईं.
स्पोक्सपर्सन ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चला है कि आरोपियों ने एक सरकारी ऑफिस से बेईमानी से 27 लाख रुपये लिए और एक सरकारी मेडिकल इंस्टीट्यूशन से 2.24 करोड़ रुपये धोखे से निकालने की योजना बनाई थी.
पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की आगे की जांच
स्पोक्सपर्सन ने आगे कहा कि पहली नजर में सबूतों के आधार पर IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 120-B और IT एक्ट की धारा 66-D के तहत अपराध साबित हुए हैं. संज्ञान लिया गया है और आगे की जांच चल रही है.
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Source: IOCL






















