जम्मू कश्मीर: NC और BJP के खिलाफ सड़कों पर उतरी PDP, 'बैक डोर नियुक्तियों' को लेकर हल्ला बोल
Jammu Kashmir Politics: जम्मू कश्मीर की राजनीति में बैक डोर नियुक्ति के मुद्दे ने खलबली मचा रखी है. जिसके बाद पीडीपी ने नेशनल कांफ्रेंस और बीजेपी के खिलाफ तंज कसा है.

जम्मू कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर उत्थल पुत्थल मच गई है. इस की वजह मौजूदा नेशनल कांफ्रेंस सभा सरकार द्वारा 25000 कथित बैक डोर नियुक्तियों का मामला है. अब जिसको को लेकर पीडीपी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे है.मामले पर पीडीपी ने नेशनल कांफ्रेंस और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है.
पीडीपी का नेशनल कांफ्रेंस पर गंभीर आरोप
जम्मू में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के कार्यकर्ताओं ने हाथों में पोस्टर लेकर विरोध किया है. नेशनल कांफ्रेंस सरकार में कथित तौर पर 25000 बैक डोर नियुक्तियों को मुद्दा बनाकर कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे हैं. इसका मकसद युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ को रोकना है. इस दौरान नेशनल कांफ्रेंस के खिलाफ नारे लगाते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस ने इन नौकरियों को देने में किसी भी कानून का पालन नहीं किया और सभी सत्ताधारी विधायकों को कोटा दिया गया ताकि वह अपने लोगों की भर्ती करवा सके.
पीडीपी ने आरोप लगाया है कि नेशनल कांफ्रेंस का दावा है कि उन्होंने 25000 नौकरियां दी हैं. लेकिन उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस से यह सवाल किया है कि इन नौकरियों को लेकर एडवर्टाइजमेंट कहां की गई. हाथों में नेशनल कांफ्रेंस के खिलाफ पोस्टर लिए इन कार्यकर्ताओं ने जम्मू में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया.
बीजेपी लोगो का ध्यान भटका रही- वीरेंद्र सिंह सोनू
पीडीपी प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह सोनू ने बीजेपी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के साथ-साथ इस में बीजेपी का भी हाथ है. इतना ही नहीं आगे कहा कि लोगों का ध्यान भटकने के लिए अब सरकार गलत बयान दे रही है और जनता को गुमराह कर रही है.
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नासिर असलम वानी ने नियुक्ति दावों को किया खारिज
मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी के मुताबिक सरकार ने पारदर्शी और मेरिट-आधारित भर्ती नीति अपनाई है और चुपके से नियुक्ति के दावों को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि हर भर्ती तय कानूनी और संस्थागत तरीकों से की जाती है, ताकि योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्षता और समान अवसर मिलें.
वही मंत्री सकीना इत्तू पहले ही यह कह चुकी है कि आउटसोर्सिंग को सरकारी भर्ती नहीं समझा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसे सिर्फ़ तुरंत काम की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपनाया जाता है. इसे सरकारी सेवा में नियमित नियुक्ति नहीं माना जा सकता.
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने बैकडोर रिक्रूटमेंट के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. सरकार ने साफ किया है कि सरकारी विभागों में सभी नियुक्तियां पूरी तरह से मेरिट और तय भर्ती प्रक्रियाओं के आधार पर की जा रही हैं.तो वही पीडीपी ने भी सरकार के इन दावों को सिरे से खारिज करके चेतावनी दी है कि अगर सरकार इन बैक डोर नियुक्तियों को वापस नहीं लेती तो वह प्रदर्शन का और कड़ा रुख अपनाएंगे.























