'सिर्फ राज्य का दर्जा नहीं...', नेशनल कॉन्फ्रेंस के आंदोलन को लेकर मीरवाइज ने रखी बड़ी मांग
Mirwaiz Umar Farooq News: फारूक अब्दुल्ला के 20 जुलाई के प्रदर्शन पर मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि आंदोलन सिर्फ राज्य का दर्जा नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के सभी अधिकारों की बहाली के लिए भी होना चाहिए.

जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला की ओर से 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन का निमंत्रण मिलने के बाद मीरवाइज-ए-कश्मीर उमर फारूक ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के सभी अधिकारों की बहाली की लड़ाई भी बनना चाहिए.
जामा मस्जिद में नमाज के बाद रखा पक्ष
हुर्रियत के पूर्व चेयरमैन ने शुक्रवार को श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में नमाज के बाद लोगों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने 13 जुलाई के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और लोगों से अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया.
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मीरवाइज ने कहा, "हम उन 21 बेगुनाह कश्मीरियों की कुर्बानी को याद करते हैं जिन्हें 95 साल पहले 1931 में इसी दिन, उस समय के तानाशाह शासकों के आदेश पर बुनियादी अधिकारों की मांग करने के कारण गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उन्होंने ही जम्मू-कश्मीर के लोगों के मानवाधिकारों और सम्मान के लिए लंबे संघर्ष की नींव रखी थी."
फारूक अब्दुल्ला के निमंत्रण की पुष्टि
मीरवाइज ने बताया कि उन्हें डॉ. फारूक अब्दुल्ला की ओर से जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण मिला है. उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी पहले भी प्रेस के जरिए सामने आ चुकी है.
उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर के लोगों के छीने गए अधिकारों को बहाल करने के लिए काम करने वाले किसी भी राजनीतिक गठबंधन, संगठन या व्यक्ति की कोई भी कोशिश, अगर ईमानदारी पर आधारित हो, तो वह समय की ज़रूरत है."
हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वह 20 जुलाई को दिल्ली में होने वाले इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे या नहीं.
अनुच्छेद 370 और राज्य के दर्जे पर भी उठाए सवाल
अपने संबोधन में मीरवाइज उमर फारूक ने वर्ष 2019 में हुए संवैधानिक बदलावों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने एकतरफा फैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 हटाया और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया.
उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा खत्म होने और संवैधानिक सुरक्षा उपाय हटने से जम्मू-कश्मीर के लोग कमजोर और अधिकारहीन हो गए.
मीरवाइज ने कहा, "यह जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रति NC सरकार की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है, जिन्होंने इस स्पष्ट वादे पर उन्हें जनादेश दिया था कि चुने जाने के बाद वे J&K का 2019 से पहले का दर्जा बहाल करेंगे, जिसमें राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 व 35A की बहाली शामिल है."
सिर्फ राज्य का दर्जा नहीं, सभी अधिकारों की मांग
मीरवाइज ने कहा कि प्रस्तावित आंदोलन को केवल राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक इसमें जम्मू-कश्मीर के लोगों के सभी संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षा उपायों की बहाली की मांग भी शामिल होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में उन राजनीतिक कैदियों और युवाओं के अधिकारों की भी बात होनी चाहिए, जो बिना किसी मुकदमे के लंबे समय से जेल में बंद हैं या जमानत मिलने के बावजूद जेल से बाहर नहीं आ सके हैं. इसके साथ ही उन्होंने संघर्ष के समाधान के जरिए स्थायी शांति और सम्मानजनक जीवन की लोगों की इच्छा को भी इस आंदोलन का हिस्सा बनाने की बात कही.
13 जुलाई के कार्यक्रम का भी किया ऐलान
मीरवाइज उमर फारूक ने 13 जुलाई को शहीद दिवस मनाने के कार्यक्रम की भी घोषणा की. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन इस साल अनुमति देता है तो परंपरा के अनुसार जुहर की नमाज के बाद लोग मज़ार-ए-शुहदा नक्शबंद साहिब जाएंगे, जहां शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और फातिहा पढ़ी जाएगी.
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शहीदों को श्रद्धांजलि देने की हर कोशिश को रोका गया. लोगों को नजरबंद किया गया और शहीद दिवस पर मिलने वाली सरकारी छुट्टी भी खत्म कर दी गई.
मीरवाइज ने कहा कि इसके बावजूद 13 जुलाई के शहीदों की कुर्बानी हमेशा जम्मू-कश्मीर के लोगों की सामूहिक यादों में जिंदा रहेगी और उन्हें अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले महान शहीदों के रूप में हमेशा सम्मान दिया जाता रहेगा.























