Jammu: ईरान-अमेरिका युद्ध का असर, खाद-डीजल महंगे होने से किसान परेशान
Jammu News In Hindi: ईरान-अमेरिका युद्ध ने जम्मू के किसानों को बुरी तरह प्रभावित किया है. गेहूं फसल कम दामों पर बिकने से नुकसान के बाद अब धान बुवाई के समय महंगाई ने किसानों को परेशान कर दिया है.

ईरान और अमेरिका के बीच फरवरी 2026 में शुरू हुए युद्ध का असर अब जम्मू-कश्मीर के किसानों पर साफ दिखाई दे रहा है. युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से खाद, डीजल और अन्य कृषि आदानों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय किसान दोहरी मार झेल रहे हैं.
गेहूं की कटाई के समय जब फसल तैयार थी, युद्ध शुरू हो गया. किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी काफी कम दाम पर बेचनी पड़ी. कई किसानों को घाटे के सौदे करने पड़े और आमदनी नाम की कोई चीज नहीं मिली.
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अब धान बुवाई पर संकट
वर्तमान में धान की बुवाई का मौसम चल रहा है, लेकिन किसानों को न तो उचित दर पर खाद मिल पा रही है और न ही किफायती दाम पर डीजल. किसानों का आरोप है कि खाद की भारी कमी है और जो उपलब्ध है, वह बेहद महंगे दाम पर बिक रही है. गेहूं में हुए नुकसान के बाद यह दूसरा बड़ा झटका है. किसान कह रहे हैं कि डीजल की कीमत बढ़ने से खेतों में ट्रैक्टर चलाने का खर्च भी बहुत बढ़ गया है. ट्रैक्टर संचालकों (ठेकेदारों) ने अपनी सेवाओं के दाम बढ़ा दिए हैं. एक किसान ने बताया, “पहले ही गेहूं नहीं बिका, अब खाद और डीजल के महंगे होने से धान की बुवाई करना मुश्किल हो गया है.”
ट्रैक्टर वालों का पक्ष
ट्रैक्टर संचालकों का कहना है कि वे भी मजबूर हैं. डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा, ट्रैक्टर के पुर्जों और रखरखाव का खर्च बढ़ने के कारण उन्हें दरें बढ़ानी पड़ीं. स्थानीय किसान नेताओं का कहना है कि यदि सरकार समय रहते हस्तक्षेप नहीं करती और खाद-डीजल पर सब्सिडी नहीं बढ़ाती, तो कई छोटे किसान खेती छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे. युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर उर्वरक उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के किसानों पर पड़ रहा है. जम्मू के किसान अब केंद्र और राज्य सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं.
हालांकि, अब युद्ध लगभग खत्म हो गया है. आन वाले वक्त में कुछ रियायत मिलने की संभावना है. फिलहाल किसान महंगाई से परेशान हैं.
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