जम्मू में भारत बंद का असर, बिजली कर्मचारियों की पेन डाउन स्ट्राइक, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
Jammu News: जम्मू में भारत बंद का आंशिक असर देखने को मिल रहा है. बिजली कर्मचारियों की पेन डाउन स्ट्राइक कर निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया. सरकार की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाए.

जम्मू में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाए गए भारत बंद का आंशिक असर देखने को मिला. संयुक्त किसान मोर्चा और देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर यहां बिजली विभाग के इंजीनियरों और कर्मचारियों ने बिजली के निजीकरण के विरोध में मोर्चा खोल दिया.
जम्मू कश्मीर पावर एंप्लाइज और इंजीनियर कोऑर्डिनेशन कमेटी के बैनर तले कर्मचारियों ने हाथों में विरोधी पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और एक दिन की पेन डाउन स्ट्राइक की. यह बंद भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते, केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के खिलाफ देशव्यापी विरोध का हिस्सा है. जिसका असर जम्मू में भी साफ तौर पर नजर आया है.
कमेटी ने केंद्र और राज्य सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
जम्मू कश्मीर पावर इंजिनियर्स एंड एम्पलाइज कोऑर्डिनेशन कमेटी के कन्वीनर सचिन टिक्कू ने केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के नाम पर जिस तरह से बिजली का निजीकरण हो रहा है. वह जम्मू कश्मीर को अंधेरे में धकेल देगा. उन्होंने कहा कि कुछ निजी कंपनियों को जम्मू कश्मीर में बिजली के विभिन्न क्षेत्रों में ठेके दिए जा रहे हैं जिसका परिणाम यह होगा कि जम्मू कश्मीर के लोगों को बिजली बिल के नाम पर लूटा जाएगा.
उन्होंने कहा कि वह स्वयं इस मामले पर कई बार प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (जो बिजली मंत्री भी है) से मिल चुके है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से सरकार ने एक योजना पद तरीके से बीएसएनल को अंधेरे में धकेल कर कुछ निजी कंपनियों को मोबाइल सेक्टर की पूरी कमान दे दी है. उसी तर्ज पर बिजली विभाग के निजीकरण के बाद निजी कंपनियां ग्राहकों से मनमाना दाम वसूलेंगे.
सरकार की गलत नीतियों के कारण यात्रियों को करना पड़ा भुगतान
हाल ही में इंडिगो प्रकरण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से ही देश के हजारों लाखों हवाई सेवा का उपयोग करने वाले यात्रियों को खामियाजा भुगतान पड़ा. उन्होंने कहा कि यह निजीकरण का ही नतीजा है कि इंडिगो एयरलाइंस में यह दिखा दिया कि बाजार पर कब्जा किसे कहते हैं. उन्होंने हैरान की जताते हुए कहा कि इंडिगो प्रकरण होने के बाद भी ना तो संसद में और ना ही किसी अन्य पटल पर इसका जिक्र हुआ.
उन्होंने विपक्षी सांसदों और जम्मू कश्मीर में विपक्ष में बैठी बीजेपी के विधायकों से अपील की कि वह सामने आकर लोगों को आने वाली मुश्किलों के बारे में आवाज उठाएं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बिजली का निजीकरण किया गया, तो जम्मू कश्मीर से ऐसी चिंगारी उठेगी कि सरकार को अपना यह फैसला वापस लेना पड़ेगा.
ये भी पढ़िए- 'तेजस्वी यादव का भ्रष्टाचार पर बोलना शेर के शाकाहारी होने जैसा', प्रशांत किशोर ने कसा तंज
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL

























